कोरपना में शनिवार का दिन शिक्षा जगत के लिए एक अविस्मरणीय क्षण बन गया, जब वसंतराव नाइक विद्यालय और जूनियर कॉलेज के हेडमास्टर तथा प्रिंसिपल पी. बी. बोंडे के सम्मान में एक भव्य रिटायरमेंट समारोह आयोजित किया गया। रूरल एजुकेशन प्रमोशन बोर्ड, कोरपना द्वारा तय आयु सीमा के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में भावनाओं और कृतज्ञता का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को गहराई तक प्रभावित कर दिया। तीन दशकों से अधिक समय तक निरंतर, निष्ठापूर्ण और सृजनात्मक सेवाएं देने वाले प्रिंसिपल बोंडे की विदाई एक युगांतकारी पड़ाव की तरह महसूस हुई।

कार्यक्रम का संचालन रूरल एजुकेशन प्रमोशन बोर्ड के अध्यक्ष श्रीधरराव गोडे की अध्यक्षता में हुआ। समारोह में पूर्व सरपंच और संगठन के सेक्रेटरी भाऊराव कारेकर, वाइस प्रेसिडेंट रमाकांत मालेकर, जॉइंट सेक्रेटरी प्रो. अरुण कुकड़े, डायरेक्टर गणेश गोडे, विलास बोर्डे, सुभाष जोगी, सतीश झाडे, अरविंद कारेकर, तुलसीराम दोहे, पत्रकार जयंत जेनेकर, मनोज गोरे, मोहब्बत खान, नव-नियुक्त प्रिंसिपल शेषराव मन्ने, सुपरवाइजर के. डी. घुगुल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रिंसिपल बोंडे के मानवीय मूल्यों, चैरिटी के कार्यों और शिक्षा के व्यापक हित में किए गए निर्णायक योगदान की सराहना की।

समारोह में यह भी रेखांकित किया गया कि बोंडे ने न केवल स्कूल की एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर संस्थान की एक विशिष्ट पहचान स्थापित की। छात्रों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देने वाले एक दूरदर्शी प्रिंसिपल के रूप में उनकी पहचान को बार-बार याद किया गया। उनके नेतृत्व में शिक्षक–कर्मचारियों को मिला प्रेरणादायक वातावरण और संस्थान को मिली निरंतर प्रगति समारोह में अनेक बार गूंजती रही।

कार्यक्रम का संचालन विनोद पंडम ने प्रभावी ढंग से किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव राहुल मेश्राम ने प्रस्तुत किया। इस आयोजन को सफल बनाने में कॉलेज के प्रोफेसर मनोहर बाम्बोडे, एम. डी. खुसपुरे, एल. जी. आडे, रमेश येलापुलवार, विनोद पंडम, प्रिया कारेकर, तथा स्कूल के पी. के. ढेंगले, ए. डी. सतपुते, के. एस. बोबड़े, आर. वी. दल, एस. एस. काले, सुप्रिया मालेकर, सीमा मालेकर, प्रज्योत अवारी, विलास धोटे, राजू लांडगे, एम. डी. खवसे, उदय डाखरे और अन्य सदस्यों ने विशेष परिश्रम किया।

विदाई समारोह में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, नॉन-टीचिंग स्टाफ और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। जब प्रिंसिपल बोंडे के दीर्घकालीन कार्यों और उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व का उल्लेख हुआ, तो कई लोगों की आंखें कृतज्ञता से नम हो उठीं। यह क्षण न केवल एक शिक्षक की विदाई थी, बल्कि शिक्षा के एक उज्ज्वल अध्याय का सम्मानजनक समापन भी था—एक ऐसा अध्याय, जिसने अनगिनत विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा दी और समर्पण तथा आदर्शवाद की मिसाल कायम की।

Pratahkal Newsroom

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