मालीगांव: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने जोन में सौर ऊर्जा क्षमता का निरंतर विस्तार किया है। रेलवे प्रशासन ने वर्ष 2011 से अब तक अपने प्रमुख मंडलों—कटिहार, अलीपुरद्वार, रंगिया, लामडिंग और तिनसुकिया—में रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना कर कुल 11.95 मेगावाट पावर (एमडब्ल्यूपी) की क्षमता हासिल कर ली है।

एनएफआर ने इन सौर ऊर्जा संयंत्रों को न केवल इन मंडलों के महत्वपूर्ण स्टेशनों, कार्यालयों और सेवा भवनों में लगाया है, बल्कि मालीगांव स्थित मुख्यालय और कारखानों में भी इसे स्थापित किया गया है। चालू वित्त वर्ष में 31 अक्टूबर तक, रेलवे ने अपने क्षेत्र के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों पर अतिरिक्त 2.80 एमडब्ल्यूपी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, एनएफआर अब प्रति माह औसतन 8.98 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन कर रहा है, जिससे रेलवे को लगभग 66 लाख रुपये प्रति माह की अनुमानित बचत हो रही है। रेलवे प्रशासन ने आगे की योजना के तहत अपनी सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 38 एमडब्ल्यूपी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में मालीगांव मुख्यालय और सभी पांच मंडलों में कार्य प्रगति पर है।

इसके अतिरिक्त, एनएफआर मुख्यालय में 1.73 एमडब्ल्यूपी की अतिरिक्त क्षमता वाले सौर संयंत्रों की स्थापना अंतिम चरण में है, जो संगठन की ऊर्जा बचत और हरित पहल को और सुदृढ़ करेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम है, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों की लागत में भी उल्लेखनीय कमी लाएगा।

एनएफआर की यह पहल पूर्वोत्तर भारत में रेलवे के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका को और मजबूती देती है, जिससे न केवल ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।

Pratahkal Bureau

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