खरीफ फसलों के लिए राहत की खबर; सरकार ने सुनिश्चित की यूरिया उपलब्धि
केंद्र सरकार ने खरीफ 2025 में किसानों को राहत देते हुए यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। समय पर योजना और समन्वय से इस बार देशभर में उर्वरक संकट नहीं दिखा।

केंद्र सरकार ने खरीफ 2025 के दौरान किसानों को यूरिया की कोई कमी महसूस नहीं होने दी। उर्वरक विभाग ने देशभर में पर्याप्त मात्रा में यूरिया और अन्य खाद उपलब्ध कराई, ताकि खेती का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे।
सरकार ने भारतीय रेलवे, बंदरगाहों, राज्य सरकारों और उर्वरक कंपनियों के साथ मिलकर पहले से ही तैयारी कर ली थी। इस योजना और तालमेल का नतीजा यह रहा कि किसानों तक समय पर यूरिया पहुँचता रहा और पूरे सीजन में सप्लाई सुचारू रही।
कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ 2025 में देश को लगभग 185 लाख मीट्रिक टन यूरिया की ज़रूरत थी, जबकि सरकार ने 230 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा की उपलब्धता सुनिश्चित की। इसका मतलब है कि मांग से कहीं अधिक स्टॉक मौजूद रहा। इससे यह भी साफ़ हुआ कि इस साल किसानों ने पिछली बार की तुलना में ज़्यादा यूरिया का इस्तेमाल किया, जो बेहतर मानसून और बढ़े हुए खेती के क्षेत्र का संकेत है।
यूरिया की मांग पूरी करने के लिए सरकार ने न सिर्फ़ घरेलू उत्पादन बढ़ाया बल्कि आयात पर भी ज़ोर दिया। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच भारत ने 58.62 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में दोगुना है। इससे न केवल खरीफ सीजन की मांग पूरी हुई बल्कि आने वाले रबी सीजन के लिए भी पर्याप्त भंडार तैयार हो गया।
अक्टूबर 2025 तक देश में यूरिया का कुल स्टॉक 68.85 लाख मीट्रिक टन हो गया, जो एक महीने पहले की तुलना में करीब 20 लाख मीट्रिक टन ज़्यादा है। वहीं, रेलवे के ज़रिए राज्यों को यूरिया की अब तक की सबसे तेज़ आपूर्ति दर्ज की गई। इससे किसानों को खेतों में समय पर खाद मिल सकी और फसल की बुआई में कोई बाधा नहीं आई।
घरेलू उत्पादन के मामले में भी देश ने अच्छा प्रदर्शन किया। अक्टूबर 2025 में 26.88 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल से अधिक है। वहीं, नवंबर और दिसंबर के लिए भी सरकार ने पहले से 17.5 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात का इंतज़ाम कर रखा है, ताकि आने वाले महीनों में भी कमी न हो।
सरकार देश में यूरिया उत्पादन बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है। असम के नामरूप और ओडिशा के तालचेर में दो नए यूरिया संयंत्र बन रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन होगी। इन परियोजनाओं के शुरू होने के बाद भारत की आयात पर निर्भरता घटेगी और देश यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा। सरकार के इन प्रयासों से साफ़ है कि खरीफ 2025 के दौरान किसानों को खाद की कोई दिक्कत नहीं आई और देश के खेतों में फसल की हरियाली बनी रही।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
