नीट पेपर लीक लातूर कनेक्शन: पूर्व प्रोफेसर पी. व्ही. कुलकर्णी सीबीआई की हिरासत में
पुणे में मनीषा वाघमारे से पूछताछ के बाद सीबीआई ने लातूर के पूर्व रसायन शास्त्र प्रोफेसर कुलकर्णी को हिरासत में लिया, एनटीए प्रश्नपत्रों तक पहुंच का संदेह।

महाराष्ट्र के लातूर में देशव्यापी नीट परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच के सिलसिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने पूर्व प्रोफेसर पी. व्ही. कुलकर्णी के निवास स्थान पर छापेमारी कर उन्हें हिरासत में लिया और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए।
लातूर: देशव्यापी स्तर पर तहलका मचाने वाले ‘नीट’ पेपर लीक मामले के तार अब सीधे महाराष्ट्र के लातूर से जुड़ गए हैं, जिससे पूरे शैक्षणिक जगत में हड़कंप मच गया है। पुणे, नाशिक और अहिल्यानगर के बाद अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लातूर में बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सेवानिवृत्त प्रोफेसर पी. व्ही. कुलकर्णी को हिरासत में ले लिया है। इस बड़ी धरपकड़ के बाद राज्य के प्राइवेट कोचिंग क्लासेस, मोटी सैलरी पर काम करने वाले परप्रांतीय (बाहरी) शिक्षकों और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के इर्द-गिर्द बुने गए पूरे एजुकेशन सिस्टम पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पी. व्ही. कुलकर्णी रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री) के प्रोफेसर हैं और वे पूर्व में लातूर के प्रतिष्ठित दयानंद कॉलेज में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वे पुणे में रह रहे थे। जांच एजेंसियों को गहरा संदेह है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा प्रक्रियाओं से सीधे जुड़े होने के कारण उनकी प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच थी। इसी पुख्ता शक के आधार पर सीबीआई की टीम ने देर रात उनके आवास पर छापेमारी की और वहां से मोबाइल फोन, अहम दस्तावेज तथा कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए हैं।
पुणे कनेक्शन से खुला लातूर का पूरा राज
इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब पुणे पुलिस ने बिबवेवाडी इलाके से मनीषा वाघमारे नामक एक ब्यूटी पार्लर संचालिका को हिरासत में लिया था। मनीषा से कड़ाई से की गई पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि उसके और प्रोफेसर कुलकर्णी के बीच फोन पर कई बार बातचीत हुई थी। इसी कॉल डिटेल और इनपुट के आधार पर सीबीआई की टीम लातूर पहुंची, जिसके बाद इस पूरे तफ्तीश का रुख ही बदल गया। इसके साथ ही नाशिक और अहिल्यानगर से भी दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह सनसनीखेज सच सामने आ रहा है कि राजस्थान से लीक हुआ यह प्रश्नपत्र महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों तक फैलाया गया था। इस पूरे खेल के कारण देश के करीब 23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
रडार पर आए नामी कोचिंग संस्थान और बाहरी शिक्षक
लातूर में दसवीं-बारहवीं की परीक्षाओं और विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक होने की चर्चाओं में प्राइवेट कोचिंग सेंटरों का नाम हमेशा उछलता रहा है। इस बार भी सीबीआई ने शहर के कुछ बेहद नामी कोचिंग क्लासेस और लाखों रुपये का मानधन (सैलरी) लेने वाले बाहरी राज्यों के शिक्षकों का पूरा डेटा खंगालना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी का मानना है कि कुछ चुनिंदा कोचिंग सेंटरों में परीक्षा की पद्धति, प्रश्नपत्र के ब्लूप्रिंट और संभावित प्रश्नों की सटीक जानकारी छात्रों को पहले ही दे दी जाती थी। इसी वजह से कई कोचिंग संचालक और शिक्षक अब सीधे जांच के दायरे में आ गए हैं।
प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर के वीडियो ने गहराया शक
नीट परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद आरसीसी (RCC) क्लासेस के संचालक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर ने सोशल मीडिया पर दो छात्राओं के इंटरव्यू का वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में छात्राओं ने खुलेआम यह दावा किया था कि कोचिंग की मॉक टेस्ट परीक्षा में जो प्रश्न पूछे गए थे, बिल्कुल वही सवाल मुख्य परीक्षा में भी आए। विशेष रूप से, 45 में से पूरे 42 प्रश्नों के हूबहू मिल जाने का दावा किए जाने के बाद से यह संशय पूरी तरह गहरा गया है। खबर है कि जिला पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं।
स्थानीय पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में
एक पीड़ित अभिभावक की शिकायत के बाद लातूर पुलिस ने कुछ प्राइवेट कोचिंग क्लासेस के खिलाफ शुरुआती जांच शुरू की थी। इस दौरान कुछ लोगों के बयान दर्ज किए गए और कुछ सामग्री भी कब्जे में ली गई थी। परंतु, स्थानीय पुलिस द्वारा की गई इस जांच की कोई भी आधिकारिक रिपोर्ट या जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके चलते बड़े कोचिंग संचालकों और कुछ रसूखदार पुलिस अधिकारियों के बीच कथित 'मधुर संबंधों' की बातें सामने आ रही हैं, जिससे लातूर की जनता अब यह सवाल उठा रही है कि क्या स्थानीय पुलिस निष्पक्ष जांच कर पाएगी?
'लातूर पैटर्न' का हुआ पूरी तरह से व्यवसायीकरण
किसी जमाने में अपनी उच्च गुणवत्ता और ईमानदारी से पढ़ाई के लिए पूरे देश में मशहूर रहा ‘लातूर पैटर्न’ अब पूरी तरह से व्यवसायीकरण के दलदल में धंस चुका है। मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के नाम पर इन प्राइवेट कोचिंग सेंटरों ने करोड़ों रुपये का एक बड़ा धंधा खड़ा कर लिया है। छात्रों और उनके माता-पिता से फीस के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की जा रही है, लेकिन इस बेहिसाब आर्थिक लेन-देन पर आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी तंत्र ने कभी भी कड़ाई से ध्यान नहीं दिया।
परीक्षा रद्द होते ही री-नीट की एडवर्टाइजमेंट से मचा बवाल
बीती 3 मई को आयोजित की गई नीट परीक्षा के रद्द होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर एक नामी प्राइवेट कोचिंग संस्थान ने अपनी 'री-नीट' (Re-NEET) स्पेशल बैच का विज्ञापन हर तरफ चमका दिया। इस जल्दबाजी ने लोगों के मन में यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इन कोचिंग संचालकों को परीक्षा रद्द होने की भनक पहले से ही थी? एक-एक विषय के लिए लाखों रुपये वसूलने वाले ये कोचिंग सेंटर अचानक इतने कम शुल्क में दोबारा कोचिंग देने के लिए क्यों तैयार हो गए, इसे लेकर भी बाजार में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं।
23 लाख छात्र-छात्राओं के भविष्य पर मंडराया संकट
देश की सबसे प्रतिष्ठित और सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के चारों तरफ बुने गए इस महाघोटाले के कारण देश के लाखों होनहार छात्रों का करियर दांव पर लग गया है। पेपर लीक की इस सुनियोजित श्रृंखला के पीछे असल में कौन से सफेदपोश चेहरे हैं, यह कितना बड़ा रैकेट है और इसमें कितने प्रभावशाली लोग शामिल हैं, इन सब का पूरी तरह पर्दाफाश करना अब सीबीआई के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

