देशभर में चर्चित नीट परीक्षा पेपरफुटी प्रकरण ने अब लातूर में जांच एजेंसियों की गतिविधियों को तेज कर दिया है। केंद्रीय अन्वेषण विभाग (सीबीआई) ने इस मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए शहर के चिकित्सा और शैक्षणिक नेटवर्क तक पहुंच बना ली है। इसी क्रम में आज लातूर शहर के एक और डॉक्टर से उनके अस्पताल में पहुंचकर सीबीआई द्वारा गहन पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इससे पूर्व इस प्रकरण में डॉ. मनोज शिरूरे को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही आरसीसी क्लासेस के प्रमुख प्रा. शिवराज मोटेगावकर तथा सेवानिवृत्त प्राध्यापक पी. व्ही. कुलकर्णी को भी सीबीआई ने हिरासत में लिया था। अब जांच एजेंसियों की नजर औसा रोड क्षेत्र में स्थित एक बड़े और नामांकित अस्पताल पर है, जहां से जुड़े एक प्रमुख डॉक्टर की भूमिका को लेकर पूछताछ की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, औसा रोड परिसर में स्थित भव्य अस्पताल से जुड़े एक नामी डॉक्टर की जांच के लिए सीबीआई सक्रिय है, हालांकि बताया जा रहा है कि उक्त डॉक्टर पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में उपस्थित नहीं हैं। इसी कारण यह भी चर्चा तेज है कि वे जांच से बचने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर, सीबीआई की एक टीम आज औसा रोड के समीप स्थित एक अन्य डॉक्टर के अस्पताल में पहुंची, जहां विस्तृत पूछताछ जारी रही। पूछताछ के बाद संबंधित डॉक्टर को नोटिस जारी किए जाने अथवा आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने लातूर के चिकित्सा एवं शैक्षणिक क्षेत्र में भारी हलचल पैदा कर दी है। जांच एजेंसियां अब नीट पेपरफुटी मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन, छात्रों से संपर्क और प्रवेश प्रक्रिया में संदिग्ध गतिविधियों की भी बारीकी से जांच कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य डॉक्टरों और शैक्षणिक क्षेत्र के व्यक्तियों पर भी जांच एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है। संभावना जताई जा रही है कि सीबीआई की टीम आगामी कुछ दिनों तक लातूर में ही डेरा डाले रहेगी।

इसी बीच, इस मामले में पहले से गिरफ्तार प्रा. शिवराज मोटेगावकर के वित्तीय लेन-देन की भी जांच तेज कर दी गई है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों इस पहलू पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जांच में यह सामने आया है कि मोटेगावकर ने लातूर सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन, भूखंड, प्लॉट और इमारतों की खरीद की है।

सूत्रों के अनुसार, उनके तथा उनके निकटवर्तियों के नाम पर शेकडों एकड़ भूमि होने की चर्चा है, जिसकी जानकारी नोंदणी व मुद्रांक शुल्क विभाग से भी मांगी गई है। जांच एजेंसियां अब इन संपत्तियों की खरीद के लिए उपयोग किए गए धन के स्रोत, वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया तथा संबंधित व्यक्तियों के आर्थिक संबंधों की गहन जांच कर रही हैं। इस पूरे मामले ने लातूर के शैक्षणिक जगत में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

Limbraj Panhalkar (Latur)

Limbraj Panhalkar (Latur)

नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर

वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)

कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)

बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग

अनुभव: 20 साल

परिचय

लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

Next Story