ऑपरेशन टाइगर की गूंज के बीच विधान परिषद चुनाव में बढ़ी सरगर्मी, अपक्ष उम्मीदवारों को मिल सकता है फायदा
महाराष्ट्र में कथित ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बीच नाशिक विधान परिषद चुनाव ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। अपक्ष उम्मीदवारों को समर्थन मिलने की अटकलों ने चुनाव परिणामों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।

नाशिक विधान परिषद चुनाव में आमने-सामने दिख रहे निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते (बाएं) और महायुति के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे (दाएं)।
महाराष्ट्र की राजनीति में कथित "ऑपरेशन टाइगर" को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसी बीच विधान परिषद चुनाव के मतदान ने राजनीतिक समीकरणों को और अधिक रोचक बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि महाविकास आघाड़ी के घटक दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने समर्थकों को एक अपक्ष उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने का संकेत दिया है, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
बुधवार को राज्यभर में कथित ऑपरेशन टाइगर को लेकर चर्चाएं जोरों पर थीं। राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा था कि छह सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इन चर्चाओं में ठाकरे गुट के नाशिक सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम भी सामने आया था। हालांकि, राजाभाऊ वाजे ने मीडिया के समक्ष स्पष्ट किया कि वे पार्टी के प्रति पूरी तरह निष्ठावान हैं और ठाकरे गुट छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच गुरुवार को विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान संपन्न हुआ। चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग या दलबदल की आशंका को देखते हुए महायुति ने अपने नगरसेवकों को एकजुट रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं और मतदान के लिए सभी को साथ लाया गया।
दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी के घटक दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) द्वारा एक अलग रणनीति अपनाए जाने की चर्चा पूरे शहर में रही। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी की ओर से प्रभावशाली अपक्ष उम्मीदवार गोकुल गीते को समर्थन देने की बात कही जा रही थी। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा लगातार बनी हुई है।
नाशिक विधान परिषद चुनाव पहले से ही महायुति और अपक्ष उम्मीदवारों के बीच मुकाबले को लेकर सुर्खियों में रहा है। चुनाव को निर्विरोध कराने के लिए महायुति के वरिष्ठ नेताओं गिरीश महाजन, उदय सामंत और दादा भुसे ने व्यापक प्रयास किए थे और उन्हें सफलता भी मिली थी। हालांकि, नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त हो चुकी थी, जिसके कारण चुनावी प्रक्रिया जारी रही।
मतपत्रिका पर महायुति के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के साथ अपक्ष उम्मीदवार गोकुल गीते और प्रसाद हिरे के नाम भी शामिल हैं। ऐसे में यदि ठाकरे गुट द्वारा अपक्ष उम्मीदवार को समर्थन दिए जाने की चर्चाएं सही साबित होती हैं, तो इसका सीधा प्रभाव चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
अब सभी की निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बदलते राजनीतिक समीकरणों और मतदान रणनीतियों के बीच आखिर विधान परिषद की सदस्यता का ताज किस उम्मीदवार के सिर सजता है। नाशिक की यह चुनावी लड़ाई राज्य की राजनीति में नए संकेत देने वाली साबित हो सकती है।

Pratahkal Bureau
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