नाशिक रिंग रोड विवाद: किसानों का आंदोलन 30 जून तक स्थगित, उच्चस्तरीय बैठक पर टिकी निगाहें
नाशिक रिंग रोड विवाद में किसानों का आंदोलन 30 जून तक स्थगित। उच्चस्तरीय बैठक और सरकार के आश्वासनों के बाद स्थिति बदली, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है, जिससे बड़ा आंदोलन फिर से खड़ा हो सकता है।

नाशिक में रिंग रोड परियोजना के विरोध में बुधवार को मुंबई नाका स्थित स्मृतिस्थल पर एकत्रित होकर आंदोलन की रणनीति बनाते प्रभावित किसान और उनके प्रतिनिधि।
नाशिक में प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना से प्रभावित किसानों के आंदोलन ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया, जब मुख्यमंत्री निवास ‘वर्षा’ के बाहर प्रस्तावित प्रदर्शन को 30 जून 2026 तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार की ओर से मंत्री गिरीश महाजन द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासन के बाद यह सहमति बनी, हालांकि किसानों ने साफ कर दिया है कि अंतिम निर्णय उच्चस्तरीय बैठक के परिणाम पर निर्भर करेगा।
बुधवार, 24 जून को मुंबई नाका स्थित क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिराव फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की स्मृतिस्थली पर श्रद्धांजलि अर्पित कर आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की गई थी। यहीं से मुख्यमंत्री निवास के बाहर आंदोलन की रूपरेखा तय की गई थी। इसके बाद मंत्री गिरीश महाजन के स्वीय सहायक संदीप जाधव और नाशिक पुलिस उपायुक्त काळे ने मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से संवाद किया। बातचीत के दौरान फोन के माध्यम से मंत्री गिरीश महाजन ने भी किसानों के प्रतिनिधियों से सीधे चर्चा की और उन्हें आश्वस्त किया।
सरकार की ओर से बताया गया कि आगामी शनिवार को रिंग रोड परियोजना को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संबंधित मंत्री, विधायक, सांसद, जिला कलेक्टर, एमएसआरडीसी, नगररचना विभाग तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में किसानों की सभी मांगों पर विस्तार से चर्चा कर न्यायपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
किसानों की प्रमुख मांगों में रिंग रोड की अलाइनमेंट में बदलाव, बाजार दर के अनुसार मुआवजा, जिरायत भूमि का पुनः सर्वेक्षण, बागायती भूमि की मान्यता, मुआवजा गणना में गुणांक 1 के स्थान पर 2 लागू करना तथा पूर्व के भूमि लेन-देन को आधार मानकर उचित भरपाई सुनिश्चित करना शामिल है।
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि बैठक तक किसी भी किसान को नई नोटिस जारी नहीं की जाएगी और न ही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। जिला प्रशासन ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि किसी प्रकार की जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इन आश्वासनों के बाद किसानों ने संयुक्त बैठक कर आंदोलन को 30 जून तक स्थगित करने का निर्णय लिया है। हालांकि, यदि शनिवार की उच्चस्तरीय बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो 30 जून को मुख्यमंत्री निवास ‘वर्षा’ के बाहर बड़े पैमाने पर आंदोलन की संभावना बनी हुई है, जिस पर अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही लिया जाएगा।

Pratahkal Bureau
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