नासिक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। बहुमत और सत्तारूढ़ गठबंधन के समर्थन के बावजूद महायुति के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को हार का सामना करना पड़ा, जबकि अपक्ष उम्मीदवार गोकुल गीते ने अप्रत्याशित जीत दर्ज कर सभी राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया।

विधान परिषद चुनाव की घोषणा के साथ ही नासिक सीट पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रही। नामांकन प्रक्रिया से लेकर मतदान तक मुकाबला मुख्य रूप से नरेंद्र दराडे और गोकुल गीते के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। महायुति की ओर से शिवसेना (शिंदे गुट) ने नरेंद्र दराडे को उम्मीदवार बनाया था। वहीं भाजपा पदाधिकारी गणेश गीते ने भाजपा की ओर से तथा उनके भाई गोकुल गीते ने अपक्ष उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था।

नासिक की यह सीट महायुति के भीतर शिवसेना (शिंदे गुट) के हिस्से में जाने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं। भाजपा नेता गिरीश महाजन के हस्तक्षेप के बाद गणेश गीते ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था। हालांकि, गोकुल गीते चुनावी मैदान में बने रहे और उनका नाम मतपत्र में शामिल रहा।

गोकुल गीते की उम्मीदवारी वापस लेने के लिए भाजपा नेता गिरीश महाजन, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता उदय सामंत और मंत्री दादा भुसे ने भी प्रयास किए थे। हालांकि, नाम वापसी की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद यह प्रक्रिया हुई, जिसके कारण उनका नाम मतपत्र से हटाया नहीं जा सका। मतदान से कुछ दिन पहले आयोजित पत्रकार परिषद में गोकुल गीते ने चुनाव से हटने की घोषणा की थी, लेकिन किसी भी उम्मीदवार को समर्थन देने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट टिप्पणी करने से परहेज किया था।

चुनाव परिणाम के बाद गोकुल गीते ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र दराडे की ओर से उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इस संबंध में एक कथित ऑडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। गीते ने यह भी दावा किया कि नरेंद्र दराडे को लेकर विभिन्न स्तरों पर नाराजगी थी और विधायक परिषद सदस्य चुने जाने के बाद पिछले छह वर्षों में उन्होंने अपेक्षित जनसंपर्क और कार्य नहीं किए, जिसके कारण उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।

विजय के बाद गोकुल गीते के शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। गोकुल गीते ने बताया कि परिणाम घोषित होने के बाद उदय सामंत ने उन्हें फोन कर शुभकामनाएं दीं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान गोकुल गीते के समर्थक नाना गामणे ने मीडिया के सामने एक कॉल रिकॉर्डिंग भी सुनाई, जिसमें गीते को मुंबई आने के लिए विशेष विमान भेजने की बात कही गई थी।

हालांकि, शिवसेना में शामिल होने के सवाल पर गोकुल गीते ने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल जीत का उत्सव मनाया जा रहा है और आगे की राजनीतिक दिशा पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।

नासिक विधान परिषद चुनाव का यह परिणाम न केवल स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि चुनावी राजनीति में अंतिम क्षण तक परिस्थितियां किस प्रकार अप्रत्याशित मोड़ ले सकती हैं। अपक्ष उम्मीदवार की यह जीत आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय बनी रह सकती है।

Pratahkal Bureau

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