आगामी नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले में शैव और वैष्णव आखाड़ों के एक साथ अमृतस्नान की महत्वपूर्ण मांग ज्ञानकुंभ परिषद में उठी है। इस मांग को शैव और वैष्णव आखाड़ों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

नाशिक में आयोजित ज्ञानकुंभ 2026 परिषद में आगामी सिंहस्थ कुंभमेले के आयोजन, आखाड़ों की परंपराओं, धार्मिक विधियों और कुंभमेले के नियोजन पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। इसी परिषद में विद्वानों ने शैव और वैष्णव परंपरा के 13 आखाड़ों के नाशिक-त्र्यंबकेश्वर में एक साथ अमृतस्नान करने की भूमिका रखी।

प्रयागराज और उज्जैन के कुंभमेलों में शैव और वैष्णव परंपरा के आखाड़ों के साधु-महंत एक साथ अमृतस्नान करते हैं। इसी तर्ज पर नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले में भी सभी आखाड़ों के एक साथ स्नान की मांग की गई है।

इस मांग पर त्र्यंबकेश्वर के आनंद आखाड़े के शंकरानंद सरस्वती महाराज ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सभी आखाड़ों से चर्चा करके एक साथ अमृतस्नान के संबंध में विचार किया जाएगा। उनके इस रुख से आगामी सिंहस्थ कुंभमेले में इस विषय पर महत्वपूर्ण निर्णय की संभावना बनी है।

ज्ञानकुंभ परिषद में आगामी सिंहस्थ कुंभमेले का आयोजन किस तरह किया जाए, उसका नियोजन कैसा हो तथा धर्मशास्त्र के अनुसार कुंभमेले का आयोजन और धार्मिक विधियां किस प्रकार संपन्न की जाएं, इस पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

परिषद में हुई चर्चा से सामने आए निर्णय, सुझाव और सिफारिशें कुंभमेला मंत्री तथा मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएंगी। यह जानकारी ज्ञानकुंभ परिषद के आयोजक महंत अनिकेत शास्त्री देशपांडे महाराज ने दी।

नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले में शैव और वैष्णव आखाड़ों का एक साथ अमृतस्नान वास्तव में होता है तो कुंभमेले की धार्मिक परंपरा की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है। हालांकि, इसके लिए सभी संबंधित आखाड़ों के बीच चर्चा और सहमति आवश्यक होगी

Pratahkal Bureau

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