नाशिक में ‘भुजबळ को पालकमंत्री बनाओ’ बैनरों से सियासत गरमाई, मंत्री ने हटाने के दिए आदेश
नाशिक में खराब सड़कों और बढ़ते हादसों के बीच छगन भुजबळ को पालकमंत्री बनाने की मांग वाले बैनरों ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। बैनरों पर मंत्री की नाराजगी, उन्हें हटाने के निर्देश और पालकमंत्री पद को लेकर मुख्यमंत्री के निर्णय की चर्चा ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

तस्वीर में नाशिक में एनसीपी द्वारा लगाया गया एक बड़ा बैनर दिखाई दे रहा है, जिसमें छगन भुजबळ को पालकमंत्री बनाने की मांग लिखी गई है और सड़क किनारे से लोग गुजर रहे हैं।
नाशिक शहर में बड़े-बड़े गड्ढों को लेकर पहले से सियासी माहौल गर्म है। इसी बीच शहर में अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से लगाए गए बैनरों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। इन बैनरों में “भुजबळांना पालकमंत्री करा” और “नाशिककरांच्या मनातील भावना” जैसे संदेशों के जरिए नाशिक को दत्तक लेने वाले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से छगन भुजबळ को नाशिक का पालकमंत्री बनाने की अपील की गई है।
नाशिक शहर में कुंभ मेले की तैयारियों के तहत कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। ड्रेनेज और गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए शहर की कई सड़कों की खुदाई की गई है। हालांकि, इन्हीं सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बनने से दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ गई है। इन हादसों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद महानगरपालिका में सत्ता में शामिल महायुति के घटक दलों ने भी आंदोलन किया। इसी क्रम में मांग उठाई गई कि यदि शहर की सड़कों की स्थिति सुधारनी है तो छगन भुजबळ को पालकमंत्री बनाया जाए।
शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए बैनरों में लिखा गया है, “दत्तक नाशिकचे पालक... मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस साहेब... भुजबळ साहेबाना पालकमंत्री करून नाशिकला खड्ड्यातून बाहेर काढा..... सर्व सामान्य नाशिक करांच्या मनातील भावना।” इन बैनरों के सामने आने के बाद सोमवार को पूरे शहर में इस बात की चर्चा रही कि भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
इस बीच, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबळ ने मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान नाशिक में लगाए गए इन बैनरों पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि शहर में लगाए गए सभी बैनरों को तत्काल हटाने के निर्देश पदाधिकारियों को दिए गए हैं। उनके निर्देश के बाद जिलाध्यक्ष दिलीप खैरे ने युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों को बैनर हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं।
नाशिक के पालकमंत्री पद को लेकर जारी चर्चा के बीच मंत्री गिरीश महाजन ने इस फैसले का अधिकार मुख्यमंत्री के पास बताया। जळगांव में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “भुजबळ साहेब ज्येष्ठ, वरिष्ठ आहेत; लोकांच्या भावना समजू शकतो. मात्र सर्वाधिकार मुख्यमंत्र्यांकडे असून तेच निर्णय घेतील।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छगन भुजबळ के साथ उनका कोई मतभेद या अबोला नहीं है।
नाशिक के पालकमंत्री पद पर शिवसेना, अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने अपना-अपना दावा किया है। फिलहाल कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नाशिक के पालकमंत्री पद को लेकर विवाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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