नंदुरबार शहर के माळीवाड़ा क्षेत्र में वर्षों से सरकारी भूमि पर निवास कर रहे सैकड़ों परिवारों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। क्षेत्र के निवासियों ने बुधवार को जिलाधिकारी मिताली सेठी को ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2011 से पूर्व अस्तित्व में आए आवासीय अतिक्रमणों को नियमित करने तथा माळीवाड़ा क्षेत्र के सुनियोजित एवं समग्र विकास की मांग की। इस पहल के साथ लंबे समय से लंबित पड़े करीब 100 से 150 परिवारों के वैध आवासीय अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

जिलाधिकारी मिताली सेठी ने नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए ज्ञापन पर सकारात्मक रुख अपनाया और विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित क्षेत्र का शीघ्र सर्वेक्षण कराया जाएगा तथा शासन के नियमानुसार वर्ष 2011 से पूर्व मौजूद आवासीय अतिक्रमणों के नियमितीकरण के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इस मांग को आगे बढ़ाने में नगरसेवक आनंद माळी, लक्ष्मण माळी, दिनेश माळी और दादा माळी ने विशेष प्रयास और सतत अनुसरण किया। उनके नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखी।

ज्ञापन में बताया गया है कि नंदुरबार स्थित सर्वे नंबर 433/1 की शासकीय खळवाड भूमि पर रहने वाले परिवार पीढ़ियों से इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। यह स्थान परंपरागत रूप से खळवाड के नाम से जाना जाता रहा है, जहां पूर्वजों द्वारा कृषि उपज की कटाई, भंडारण, पशुपालन तथा अन्य कृषि संबंधी गतिविधियां संचालित की जाती थीं। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण यह क्षेत्र सरकारी अभिलेखों में भी खळवाड के नाम से दर्ज है।

निवासियों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले से ही कच्चे मकान और झोपड़ियां मौजूद थीं। समय के साथ आर्थिक क्षमता के अनुसार परिवारों ने धीरे-धीरे पक्के मकानों का निर्माण किया। वर्तमान में यहां लगभग 100 से 150 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश लोग खेती, हमाली, मजदूरी, छोटे व्यवसाय और अन्य श्रम आधारित कार्यों से अपना जीवनयापन करते हैं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगरपालिका प्रशासन वर्षों से इस बस्ती को सड़क, पेयजल, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता और कचरा संग्रहण जैसी मूलभूत नागरिक सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। इतना ही नहीं, कई मकानों पर संपत्ति कर और अन्य स्थानीय करों की वसूली भी की जा रही है। निवासियों का कहना है कि उन्होंने जीवनभर की जमा-पूंजी खर्च कर अपने परिवारों के लिए ये घर बनाए हैं और अधिकांश परिवारों के पास इसके अतिरिक्त कोई अन्य आवासीय संपत्ति उपलब्ध नहीं है।

नागरिकों ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि क्षेत्र में सड़कें और कुछ खुली जगहें उपलब्ध हैं, जिससे ले-आउट नियमितीकरण की प्रक्रिया संभव है। उन्होंने शासन द्वारा निर्धारित शुल्क, प्रीमियम अथवा अन्य राजस्व देयकों का भुगतान करने की भी तत्परता जताई है।

माळीवाड़ा के निवासियों का मानना है कि यदि इस बस्ती का नियमितीकरण किया जाता है तो क्षेत्र का नियोजित विकास संभव होगा, नागरिकों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और वर्षों से अनिश्चितता में जी रहे सैकड़ों लोगों को स्थायी राहत प्राप्त होगी। अब सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा प्रस्तावित सर्वेक्षण और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau

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