नंदुरबार में आयोजित जिल्हास्तरीय अविष्कार 2025 स्पर्धा में शिक्षा और नवाचार का प्रभावी संगम देखने को मिला, जहां जिल्हाधिकारी डॉ. मित्ताली सेठी ने विशेष प्रकल्पों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस दिशा में प्रशासन व विद्यार्थियों के संयुक्त प्रयास निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

आदिवासी अकादमी नंदुरबार तथा विज्ञान–वाणिज्य महाविद्यालय मोलगी के संयुक्त विद्यमान से आयोजित इस स्पर्धा का उद्घाटन डॉ. मित्ताली सेठी के हाथों हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता आदिवासी अकादमी के संचालक डॉ. किशोर पवार ने की। इस अवसर पर उमवी प्रबंधन परिषद सदस्य प्राचार्य एम.जे. रघुवंशी, अविष्कार निरीक्षक प्रा. के.एस. विश्वकर्मा, प्रा. स्मिता देशमुख और योगेश राणे उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह में बोलते हुए डॉ. सेठी ने कहा कि अनुसंधान और नवकल्पनाओं में विद्यार्थियों की भागीदारी से समाज और विज्ञान दोनों के विकास में नई दिशा मिलती है। वहीं डॉ. पवार ने बताया कि अविष्कार जैसे उपक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक और वैज्ञानिक समस्याओं को नई दृष्टि से समझने की क्षमता विकसित करते हैं, जिससे वे समाधान खोजने की दिशा में अधिक सक्षम बनते हैं।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्रा. स्मिता देशमुख ने प्रस्तुत किया और अविष्कार उपक्रम की संपूर्ण रूपरेखा बताई। इस वर्ष स्पर्धा में 183 अनुसंधान प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें कुल 256 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी नवाचारी सोच का प्रदर्शन किया। चयनित प्रतिभागियों को आगामी 30 और 31 दिसंबर को विश्वविद्यालय स्तर पर अपनी परियोजनाएँ प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें राज्यस्तरीय मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने का नया द्वार खुलेगा।

अविष्कार 2025 स्पर्धा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि नंदुरबार के विद्यार्थी अनुसंधान, नवाचार और प्रगतिशील विचारों में किसी से कम नहीं हैं, और प्रशासनिक सहयोग से आने वाले वर्षों में यह प्रयास और अधिक प्रभावशाली रूप से आगे बढ़ सकता है।नंदुरबार में आयोजित जिल्हास्तरीय अविष्कार 2025 स्पर्धा में शिक्षा और नवाचार का प्रभावी संगम देखने को मिला, जहां जिल्हाधिकारी डॉ. मित्ताली सेठी ने विशेष प्रकल्पों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस दिशा में प्रशासन व विद्यार्थियों के संयुक्त प्रयास निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

आदिवासी अकादमी नंदुरबार तथा विज्ञान–वाणिज्य महाविद्यालय मोलगी के संयुक्त विद्यमान से आयोजित इस स्पर्धा का उद्घाटन डॉ. मित्ताली सेठी के हाथों हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता आदिवासी अकादमी के संचालक डॉ. किशोर पवार ने की। इस अवसर पर उमवी प्रबंधन परिषद सदस्य प्राचार्य एम.जे. रघुवंशी, अविष्कार निरीक्षक प्रा. के.एस. विश्वकर्मा, प्रा. स्मिता देशमुख और योगेश राणे उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह में बोलते हुए डॉ. सेठी ने कहा कि अनुसंधान और नवकल्पनाओं में विद्यार्थियों की भागीदारी से समाज और विज्ञान दोनों के विकास में नई दिशा मिलती है। वहीं डॉ. पवार ने बताया कि अविष्कार जैसे उपक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक और वैज्ञानिक समस्याओं को नई दृष्टि से समझने की क्षमता विकसित करते हैं, जिससे वे समाधान खोजने की दिशा में अधिक सक्षम बनते हैं।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्रा. स्मिता देशमुख ने प्रस्तुत किया और अविष्कार उपक्रम की संपूर्ण रूपरेखा बताई। इस वर्ष स्पर्धा में 183 अनुसंधान प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें कुल 256 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी नवाचारी सोच का प्रदर्शन किया। चयनित प्रतिभागियों को आगामी 30 और 31 दिसंबर को विश्वविद्यालय स्तर पर अपनी परियोजनाएँ प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें राज्यस्तरीय मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने का नया द्वार खुलेगा।

अविष्कार 2025 स्पर्धा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि नंदुरबार के विद्यार्थी अनुसंधान, नवाचार और प्रगतिशील विचारों में किसी से कम नहीं हैं, और प्रशासनिक सहयोग से आने वाले वर्षों में यह प्रयास और अधिक प्रभावशाली रूप से आगे बढ़ सकता है।

Pratahkal Newsroom

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