नंदुरबार जिले की आश्रमशालाओं में मंगलवार का दिन एक अनोखा विरोध का साक्षी बना, जब सैकड़ों शिक्षक टीईटी अनिवार्यता निर्णय के विरोध में काली फीत बांधकर कक्षा में उपस्थित हुए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 2013 से पहले नियुक्त कक्षा 1 से 8 के शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा अनिवार्य होने की संभावना ने जिले भर के शिक्षकों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।

लंबे समय से आश्रमशालाओं में सेवा दे रहे इन शिक्षकों को आशंका है कि अचानक लागू होने वाली यह शर्त उनकी सेवाओं की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। आश्रमशालाओं का निवासी स्वरूप देखते हुए स्कूल बंद रखने का विकल्प उपलब्ध नहीं था, इसलिए शिक्षकों और कर्मचारियों ने शांततामय तरीके से काली फीत बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। विद्यालयों में पढ़ाई का क्रम जारी रहा, लेकिन वातावरण में चिंता और रोष साफ महसूस किया जा सकता था।

नंदुरबार जिले की सभी आश्रमशालाओं ने एकमत होकर मांग की है कि टीईटी की सक्ती तुरंत रद्द की जाए, जिससे वर्षों से निष्ठा के साथ कार्यरत शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रह सके। इस सामूहिक आंदोलन का नेतृत्व आदिवासी विकास विभाग शासनमान्यता संघटना के संस्थापक अध्यक्ष विक्रम गायकवाड, राज्याध्यक्ष संतोष राऊत, सरचिटणीस नंदकिशोर जगताप, सचिव सचिन वाघ, कार्याध्यक्ष सुभाष बावा, नाशिक विभागीय अध्यक्ष आर. के. तडवी, कार्याध्यक्ष महेश पाटील, कमलाकर पाटील और नंदुरबार प्रकल्पाध्यक्ष सुरेखा वसावे द्वारा किया गया।

यह आंदोलन जिले के शिक्षकों की उस गहरी बेचैनी को उजागर करता है, जिसमें वे अपने अधिकारों और सेवा-स्थिरता की रक्षा के लिए संगठित होकर खड़े हैं। अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि सरकार इस व्यापक विरोध पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है।

Pratahkal Newsroom

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