चंद्रपुर जिले के कोरपना तालुका अंतर्गत नांदा फाटा में सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकार क्षेत्र वाला बस स्टैंड वर्तमान में अतिक्रमण की चपेट में आ गया है। बस स्टैंड परिसर में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय संचालित होने के कारण यात्रियों के लिए उपलब्ध स्थान दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप बस की प्रतीक्षा करने वाले नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और बस स्टैंड का मूल उद्देश्य ही समाप्त होता नजर आ रहा है।

नांदा फाटा इस क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ से कोरपना, गडचांदूर, राजुरा, वणी और आसपास के विभिन्न गांवों की ओर जाने वाले यात्रियों की बड़ी आवाजाही रहती है। विद्यार्थी, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, मजदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में इस बस सेवा का लाभ उठाते हैं। हालांकि, बस स्टैंड परिसर में अतिक्रमण बढ़ने से यात्रियों को सुरक्षित रूप से खड़े होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। बस स्टैंड की जगह पर सब्जी विक्रेताओं सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियां स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। यात्रियों के बैठने और खड़े रहने के स्थान पर ही विक्रेताओं ने अपनी दुकानें सजा ली हैं, जिससे यह पूरा परिसर किसी बाजार की तरह दिखाई देता है।

विशेष रूप से भीड़भाड़ के समय यात्री, विक्रेता और वाहनों की वजह से यहाँ भारी जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसी स्थिति में बस आने पर यात्रियों के लिए वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना कठिन हो जाता है। नागरिकों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि इस अव्यवस्था के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। बस स्टैंड के रखरखाव और अतिक्रमण पर नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होने के बावजूद यह अवैध कब्जा कैसे बढ़ता गया, इसे लेकर नागरिकों में रोष है। लोगों का कहना है कि शुरुआत में यह अतिक्रमण बहुत कम था, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने से अब इसने विकराल रूप ले लिया है।

अतिक्रमण के कारण नांदा फाटा बस स्टैंड पर बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है। यात्रियों को धूप, बारिश और भीड़ के दौरान सुरक्षित आश्रय, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल और उचित प्रकाश व्यवस्था की आवश्यकता है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि वह केवल कागजी कार्रवाई न करते हुए मौके पर जाकर बस स्टैंड परिसर की मोजणी (पैमाइश) करे और सार्वजनिक उपयोग की इस जगह को खाली कराए।

इस समस्या पर होटल व्यवसायी विलास लांडगे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बस स्टॉप के सामने अतिक्रमण की वजह से जगह बेहद कम बची है। इसके कारण बस का इंतजार करने वाले यात्री और अन्य वाहन उनकी दुकान के सामने खड़े किए जाते हैं, जिससे उन्हें और उनके ग्राहकों को मानसिक और व्यावहारिक परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण हटाकर यातायात सुचारू करने की मांग की है।

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज इंगले ने इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरते हुए कहा कि मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण से हर नागरिक त्रस्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के निर्वाचित पदाधिकारी इस ओर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं हैं और सार्वजनिक निर्माण विभाग की उपस्थिति भी केवल नाममात्र की रह गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि शाम 5 से 7 बजे तक बाजार के मुख्य मार्ग को सब्जी मंडी के लिए आरक्षित कर यातायात के लिए बंद रखा जाना चाहिए।

पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य अभय मुनोत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत द्वारा बाजार के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध न कराए जाने के कारण किसानों को मजबूरी में सड़क किनारे बैठकर सब्जी बेचनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत पदाधिकारी पीडब्ल्यूडी की ओर इशारा कर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं, जबकि ग्राम पंचायत के अधीन आने वाली सड़कों पर भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है। यदि बाजार के लिए अलग जगह आवंटित की जाए, तो ही अतिक्रमण का यह मुद्दा स्थायी रूप से हल हो सकता है।

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