नागपंचमी पर भारतमाता हाईस्कूल में विद्यार्थियों को मिला सर्पज्ञान, अंधविश्वास से बचने की सीख
बिद्री के भारतमाता हाईस्कूल में नागपंचमी पर सर्पज्ञान कार्यक्रम हुआ, जहां सयाजी चौगले ने सापों से जुड़े अंधविश्वास और भय दूर करने की जानकारी दी।

तस्वीर में सर्पमित्र सयाजी चौगले भारतमाता हाईस्कूल बिद्री में नागपंचमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
बिद्री (ता. कागल) स्थित भारतमाता हाईस्कूल में नागपंचमी के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए सर्पज्ञान एवं जनजागृति कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सर्पमित्र सयाजी चौगले ने विद्यार्थियों को सापों से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी देते हुए उनके प्रति समाज में व्याप्त गलत धारणाओं, भय और अंधविश्वास को दूर करने की आवश्यकता बताई।
सयाजी चौगले ने कहा कि साप प्रकृति की खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण घटक हैं और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका अनमोल है। उन्होंने कहा कि सापों के संबंध में समाज में मौजूद गलत धारणाओं, भय और अंधविश्वास को दूर कर उनके प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान सयाजी चौगले ने विद्यार्थियों को विषैले और गैर-विषैले सापों की पहचान के संकेतों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साप इंसान को क्यों काटता है, सर्पदंश होने के बाद कौन से प्राथमिक उपचार किए जाने चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश साप गैर-विषैले होते हैं तथा इंसानों के लिए खतरा पैदा करने वाले विषैले सापों की प्रजातियों की संख्या सीमित है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि साप दिखाई देने पर घबराकर उसे मारने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और नजदीकी सर्पमित्र को बुलाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सर्पदंश होने पर अंधविश्वास आधारित उपचारों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि तत्काल चिकित्सकीय उपचार लेना आवश्यक है।
कार्यक्रम में प्रभारी मुख्याध्यापक टी. आर. पाटील, एम. जी. फराकटे, सी. डी. कुंभार, एस. एस. फराकटे, व्ही. आर. कुंभार, एस. एस. माजगावकर, एस. एम. पाटील, जी. यु. महिंद, टी. पी. भोसले, व्ही. डी. वारके, सतीश चव्हाण, अनिल कांबले और राजेंद्र वारके सहित विद्यार्थी-विद्यार्थिनियां उपस्थित रहे।
नागपंचमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को सापों के प्रति वैज्ञानिक जानकारी देने के साथ उनके संरक्षण और सर्पदंश की स्थिति में उचित चिकित्सकीय उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

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