46 साल बाद फिर मिले 1980 बैच के विद्यार्थी, मुरगूड विद्यालय में सजा यादों का सिलसिला
महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित मुरगूड विद्यालय में 1980 बैच के दसवीं के पूर्व विद्यार्थी 46 साल बाद एकत्र हुए। शिक्षकों का सम्मान, पुरानी यादें, छात्राओं की ओटी भरने की रस्म और विद्यालय के विकास में सहयोग का संकल्प सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण रहे।

तस्वीर में कोल्हापुर के मुरगूड विद्यालय जूनियर कॉलेज में वर्ष 1980 के दसवीं के पूर्व विद्यार्थी और शिक्षक स्नेह सम्मेलन के दौरान एक साथ नजर आ रहे हैं।
कोल्हापुर। शिक्षा प्रसारक मंडल, कोल्हापुर द्वारा संचालित मुरगूड विद्यालय जूनियर कॉलेज में वर्ष 1980 में दसवीं की परीक्षा देने वाले पूर्व विद्यार्थियों का स्नेह सम्मेलन उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। 46 साल बाद एक साथ आए मित्रों ने स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं और पुरानी दोस्ती के रिश्तों को फिर से मजबूत किया। इस दौरान विद्यालय के प्रति प्रेम, अपनापन और कृतज्ञता की भावनाएं भी व्यक्त की गईं। मित्रों की बातचीत, हंसी-मजाक और पुराने संस्मरणों से विद्यालय परिसर चहल-पहल से भर गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पौधे को पानी देने और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। समारोह की अध्यक्षता विद्यालय के सेवानिवृत्त लिपिक पी. एन. डाफळे ने की। कोल्हापुर जिला माध्यमिक शिक्षा संस्था के पूर्व अध्यक्ष चंद्रकांत जाधव ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। उन्होंने बताया कि व्यस्त जीवन में एक-दूसरे के तनाव दूर करने, पुरानी यादों को ताजा करने और विद्यालय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से इस स्नेह सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित पूर्व शिक्षकों और गुरुजनों का शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। वहीं, आयोजकों की ओर से पूर्व छात्राओं की ओटी भरने का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस आयोजन ने सम्मेलन को पारिवारिक आत्मीयता का स्वरूप प्रदान किया।
पूर्व विद्यार्थियों में प्रा. चंद्रकांत जाधव, विवेकानंद कवळेकर, माधुरी पाटील-यादव, अरुणा एकल, आर. डी. लोहार और पी. पी. पाटील ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्कूली जीवन की शरारतों, शिक्षकों के मार्गदर्शन, मित्रों के साथ बिताए पलों और उस दौर की यादों को ताजा किया। संस्मरण साझा करते समय कई पूर्व विद्यार्थी भावुक हो गए। सभी ने विद्यालय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उसके विकास के लिए यथासंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मुरगूड विद्यालय जूनियर कॉलेज के प्राचार्य एस. पी. पाटील ने विद्यालय के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता पूर्व वर्ष 1946 में संस्थापक बैरिस्टर बालासाहेब खर्डेकर ने विद्यालय की स्थापना की थी। शिक्षामहर्षि प्राचार्य एम. आर. देसाई और गुरुवर्य ग. बा. सावंत ने भी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन महान शिक्षाविदों द्वारा लगाए गए शैक्षणिक पौधे को आज वटवृक्ष के रूप में विकसित होते देखकर संतोष होता है।
अध्यक्षीय संबोधन में पी. एन. डाफळे ने कहा कि 46 साल बाद एकत्र हुए पूर्व विद्यार्थियों का यह स्नेह सम्मेलन संस्था के ईमानदार शैक्षणिक कार्य की उपलब्धि का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पूर्व विद्यार्थियों का कृषि, उद्योग, शिक्षा, व्यापार, परिवहन और बैंकिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर आनंदमय जीवन जीना ही शिक्षकों की सेवा का वास्तविक प्रतिफल है। उन्होंने सभी को स्वस्थ और आनंदमय जीवन जीने का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का संचालन एम. बी. टिपुगडे ने किया, जबकि आनंदा नरतंवडेकर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर व्ही. के. पाटील, आर. डी. कोरे, एम. के. नलवडे, ए. एन. पाटील, सोपान खराडे, बालासो लोकर, के. डी. सुतार, पांडुरंग कुंभार, चंद्रकांत कुंभार और सुरेश जाधव सहित बड़ी संख्या में पूर्व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
स्नेह सम्मेलन का उत्कृष्ट आयोजन प्रा. चंद्रकांत जाधव, विवेकानंद कवळेकर और शिवाजी कुडवे ने किया।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
