मुरगूड में बैलगाड़ी से हुआ नन्हे विद्यार्थियों का राजसी स्वागत, शिवाजी विद्यामंदिर में जश्न
मुरगूड के शिवाजी विद्यामंदिर में नए शैक्षणिक सत्र का अनूठा आगाज, जहां बैलगाड़ी की सवारी और राजसी स्वागत ने सबका मन मोह लिया। क्या सरकारी स्कूल में दाखिले की इस अनोखी परंपरा ने शिक्षा के प्रति अभिभावकों का नजरिया बदल दिया है? जानें पूरी रिपोर्ट।

मुरगूड के शिवाजी विद्यामंदिर स्कूल क्रमांक २ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के अवसर पर विद्यार्थियों का पारंपरिक वेशभूषा में स्वागत करते अतिथि और शिक्षक।
मुरगूड के शिवाजी विद्यामंदिर स्कूल क्रमांक २ में शैक्षणिक वर्ष २०२६-२७ का आगाज किसी उत्सव से कम नहीं रहा। शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों में उत्साह और आत्मीयता पैदा करने के उद्देश्य से स्कूल प्रशासन ने नवागत छात्रों के लिए एक ऐसी अनूठी स्वागत परंपरा निभाई, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान आकर्षित कर लिया। इस कार्यक्रम के दौरान नन्हे-मुन्नों का पारंपरिक अंदाज में किया गया भव्य स्वागत न केवल चर्चा का विषय बना, बल्कि सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों के बदलते नजरिए को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित कर गया।
स्वागत समारोह की शुरुआत अंबाबाई मंदिर परिसर से हुई, जहां से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-ताशों, लेझीम और कैताल की थाप पर निकली इस रैली में नवागत विद्यार्थियों को विशेष रूप से सजाई गई बैलगाड़ियों में बैठाया गया था। शिवाजी रोड से होते हुए एस. टी. स्टैंड और वहां से स्कूल तक पहुंची इस शोभायात्रा ने पूरे मार्ग को जीवंत बना दिया। स्कूल पहुंचने पर नन्हे छात्रों का स्वागत किसी राजकुमार और राजकुमारी की तरह किया गया। बालकों को पारंपरिक फेटे पहनाए गए, तो बालिकाओं को आकर्षक 'प्रिन्सेस मुकुट' भेंट किए गए। नगराध्यक्षा सौ. सुहासिनीदेवी पाटील और स्कूल प्रबंधन समिति की उपाध्यक्षा वर्षा भोसले ने औपचारिक रूप से विद्यालय की घंटी बजाकर नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर नगरपरिषद् के जलापूर्ति सभापति सत्यजितसिंह पाटील ने सरकारी विद्यालयों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये शिक्षण संस्थान आम नागरिकों की असली धरोहर हैं, जो संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं। शैक्षणिक गुणवत्ता के प्रति बढ़ते भरोसे का प्रमाण यह रहा कि स्कूल में प्रवेश के लिए २६ सीटें निर्धारित थीं, लेकिन पहले ही दिन ३२ विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गुलाब के फूल, स्लेट (पाटी) और पाठ्यपुस्तकें भेंट की गईं। इस अनूठे आयोजन में विद्यालय के मुख्यध्यापक प्रवीण अंगज, विजय मेंडके, पूजा बोटे, गणेश वंडकर और मानसिंग गोधडे सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह भव्य शुरुआत न केवल विद्यार्थियों के मन में विद्यालय के प्रति प्रेम जगाने में सफल रही, बल्कि शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और आनंददायी दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
