मुरगूड में रक्षाबंधन का पर्व सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश के साथ मनाया गया। मुरगूड ज्येष्ठ नागरिक संघ में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी की ओर से सामुदायिक रक्षाबंधन समारोह उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। यह आयोजन लगातार छठे वर्ष हुआ, जिसमें राखी के पवित्र धागे के माध्यम से विश्वशांति और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी, मुरगूड शाखा की लता बहेनजी ने कहा कि मानवीय मन में मौजूद विष को दूर कर अशुभ का नाश करने का सामर्थ्य राखी के पवित्र धागे में है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि विश्वशांति का संदेश देने वाला पवित्र संस्कार है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष गजाननराव गंगापूरे ने की। लता बहेनजी ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि वेदकाल से विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से रक्षाबंधन की परंपरा भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का संदेश देती आ रही है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के माध्यम से परमात्मा और आत्मा की अनुभूति प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रजापिता ब्रह्मकुमारी की ओर से पूरे भारत में सामुदायिक रक्षाबंधन समारोह आयोजित किए जाते हैं।

प्रारंभिक संबोधन में गजाननराव गंगापूरे ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा की विरासत को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के युग में भी मनुष्य को अपने रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारी को बनाए रखना चाहिए।

समारोह में संघ के उपाध्यक्ष पी. डी. मगदूम, सचिव सखाराम सावर्डेकर, कोषाध्यक्ष शिवाजी सातवेकर, एम. टी. सामंत, पी. व्ही. पाटील, अशोक डवरी और मारुति रावण सहित संघ के सदस्य उपस्थित रहे। सदाशिव एकल ने स्वागत किया। जयवंत हावळ ने आभार व्यक्त किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन अविनाश चौगले ने किया।

समारोह के दौरान लता बहेनजी ने उपस्थित लोगों को राखी बांधी और रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस सामुदायिक आयोजन के माध्यम से रक्षाबंधन को पारिवारिक रिश्तों से आगे बढ़ाकर विश्वशांति, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया गया।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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