वेदगंगा नदी पर स्थित मुरगूड-कुरणी बांध का जीर्णोद्धार कार्य अचानक रोक दिए जाने से स्थानीय निवासियों में भारी चिंता और आक्रोश व्याप्त है। एक ओर जहाँ बांध की दयनीय स्थिति सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर मानसून के आगमन के साथ ही जल स्तर बढ़ने से उपजे दबाव के कारण इस संरचना के ढहने की आशंका गहरा गई है। यह बांध न केवल जल संचयन का महत्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि स्थानीय परिवहन के लिए एक प्रमुख मार्ग के रूप में भी उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में बांध के पत्थर के खंभे बुरी तरह कमजोर हो चुके हैं, जिससे उनमें दरारें आ गई हैं और ढांचा जर्जर अवस्था में पहुंच गया है।

प्रशासन द्वारा बांध की स्थिति को देखते हुए करीब साठ लाख रुपये की निधि स्वीकृत की गई थी और संबंधित ठेकेदार को विधिवत कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) भी सौंपा गया था। प्रारंभिक चरण में ठेकेदार द्वारा बांध के पास भराव का कार्य शुरू भी कर दिया गया था, जिससे लोगों को उम्मीद बंधी थी कि जल्द ही यह प्रमुख मार्ग आवाजाही के लिए सुरक्षित हो जाएगा। हालांकि, बिना किसी पूर्व सूचना के न केवल निर्माण कार्य रोक दिया गया, बल्कि नदी के पात्र में डाला गया भराव भी हटा लिया गया, जिससे पूरा मामला रहस्यमय हो गया है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि निषेधाज्ञा के बावजूद भारी वाहनों का इस जर्जर बांध से होकर गुजरना निरंतर जारी है। भारी वाहनों के भार और कंपन से बांध की सतह पर बनी कंक्रीट की सड़क पहले ही टूट-फूट का शिकार हो चुकी है, जिससे अक्सर दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का प्रश्न है कि जब निधि आवंटित हो चुकी है और कार्य की स्वीकृति भी मिल चुकी है, तो फिर मरम्मत कार्य को किस आधार पर अधर में लटकाया गया है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले मानसून में यह क्षतिग्रस्त बांध बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है, जिसकी पूरी जवाबदेही प्रशासन की होगी। क्षेत्रवासी अब तत्काल प्रभाव से मरम्मत कार्य पुन: शुरू करने और इस महत्वपूर्ण संरचना को सुरक्षित बनाने की मांग पुरजोर तरीके से कर रहे हैं।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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