हर साल बारिश का मौसम शुरू होते ही मुंबई में BMC और MHADA खतरनाक और पुरानी इमारतों की सूची जारी करती हैं। इन इमारतों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए यह नोटिस अचानक घर खाली करने के आदेश में बदल जाता है। इससे लोगों के सामने डर, चिंता और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो जाते हैं। AajTak

हाल ही में नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) ने 34 इमारतों को ‘अत्यंत खतरनाक’ यानी C-1 श्रेणी में चिन्हित किया है। नगर निगम ने इन इमारतों में रहने वाले लोगों को तुरंत मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं करने पर बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। AajTak

अधिकारियों के मुताबिक मानसून के दौरान इमारतों के ढहने से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए यह एहतियाती कदम जरूरी है। तकनीकी और कानूनी परिभाषा में खतरनाक या जर्जर इमारत वह ढांचा है, जो संरचनात्मक रूप से असुरक्षित हो चुका हो और जिससे इंसानी जिंदगी तथा संपत्ति को सीधा खतरा हो। AajTak

इमारतों के जर्जर होने के पीछे अत्यधिक उम्र, कंक्रीट के अंदर स्टील सरियों में जंग, कमजोर नींव, पिलर और बीम को नुकसान, लगातार पानी का रिसाव और वर्षों तक उचित रखरखाव न होना जैसे मुख्य कारण होते हैं। मानसून की भारी बारिश में ऐसी इमारतों के गिरने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। AajTak

मुंबई में जर्जर इमारतों की पहचान और बेदखली की प्रक्रिया दो अलग-अलग एजेंसियां संभालती हैं। BMC पूरे शहर में पुरानी और जर्जर इमारतों का सर्वे करती है, जबकि MHADA मुख्य रूप से दक्षिण और मध्य मुंबई की पुरानी ‘सेस्ड’ (Cessed) इमारतों का मानसून-पूर्व वार्षिक निरीक्षण करती है। निरीक्षण के बाद दोनों एजेंसियां जर्जर इमारतों की अलग-अलग सूची जारी करती हैं और खतरनाक पाई गई इमारतों के निवासियों को तुरंत खाली करने का नोटिस देती हैं। AajTak

BMC इमारतों की तकनीकी स्थिति के आधार पर उन्हें चार प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत करती है। C1 श्रेणी में अत्यंत खतरनाक इमारतें आती हैं। इन्हें तुरंत खाली कराया जाता है और बिना देरी किए ध्वस्त करना अनिवार्य होता है। C2A श्रेणी में गंभीर मरम्मत की जरूरत होती है और इसके लिए निवासियों को अस्थायी रूप से घर खाली करना पड़ता है। C2B श्रेणी में भी गंभीर मरम्मत की जाती है, लेकिन निवासियों को मकान खाली करने की आवश्यकता नहीं होती। C3 श्रेणी में मामूली मरम्मत वाली इमारतें आती हैं, जहां छोटी-मोटी टूट-फूट का काम किया जाता है और इमारत को रहने के लिए पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। AajTak

इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य बारिश के दौरान होने वाले हादसों को रोकना है। मुंबई में हर साल मानसून के दौरान पुरानी और बिना मरम्मत वाली इमारतों के गिरने या दीवारें ढहने की घटनाएं सामने आती हैं। किसी अप्रिय घटना के बाद राहत कार्य चलाने के बजाय प्रशासन भारी बारिश शुरू होने से पहले ही लोगों को सुरक्षित निकालने की नीति पर काम करता है। AajTak

Pratahkal Bureau

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