मुंबई की BDD चॉल के नायगांव परिसर में पुनर्विकसित इमारतों में नए घर मिलने के सात महीने बाद भी हजारों परिवार पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने यहां नए मकानों का कब्जा देना शुरू किया था, लेकिन दो बीएचके फ्लैटों में रहने पहुंचे परिवारों को बुनियादी जरूरत के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। निवासियों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन केवल 5 से 45 मिनट तक पानी मिल रहा है। MHADA और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

राज्य सरकार ने इस पुनर्विकास परियोजना को शहरी नवीनीकरण की एक बड़ी पहल के रूप में प्रस्तुत किया था। हालांकि, पानी की अपर्याप्त आपूर्ति ने नए घरों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

निवासियों द्वारा गठित तदर्थ आवास समिति के उपाध्यक्ष सुदर्शन बोले ने बताया कि MHADA ने नायगांव स्थित BDD चॉल की नई इमारतों में 5,181 आवासीय इकाइयों के लिए 37 लाख लीटर पानी की मांग की थी। इसके बावजूद BMC ने पहले चरण के तहत आठ टावरों के लिए प्रतिदिन केवल 6.40 लाख लीटर पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। नगर निगम ने कहा था कि अतिरिक्त बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद पानी की आपूर्ति बढ़ाई जा सकेगी।

इस परियोजना को लेकर BMC के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग ने नवंबर 2016 में MHADA को अनापत्ति संबंधी मंजूरी दी थी। उस पत्र में कहा गया था कि प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 90 लीटर पानी की आपूर्ति की जाएगी। पत्र के अनुसार, प्रचलित मानकों के तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था मुख्य जलापूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने के बाद, जरूरत पड़ने पर, की जानी थी।

मार्च में जब फ्लैटों का पहला समूह आवंटित किया गया, तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे ‘अग्रिम गुड़ी पड़वा उपहार’ बताया था। लेकिन पानी की कमी ने मौजूदा त्योहारों के मौसम को भी निवासियों के लिए तनावपूर्ण बना दिया है।

इस साल की शुरुआत में निवासियों द्वारा पानी की समस्या उठाए जाने के बाद MHADA ने अस्थायी व्यवस्था के तौर पर पानी के टैंकरों की आपूर्ति शुरू कराई थी। हालांकि, निवासियों का आरोप है कि टैंकरों से पानी नियमित रूप से नहीं मिला और इससे संकट का समाधान नहीं हो सका।

पानी की आपूर्ति को लेकर MHADA और BMC के बीच जिम्मेदारी का सवाल भी सामने आया है। निवासियों के मुताबिक, MHADA ने उन्हें समाधान के लिए BMC से संपर्क करने को कहा है। वहीं, नगर निगम का कहना है कि आवश्यक मात्रा में पानी उपलब्ध कराने के लिए मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन नेटवर्क को मजबूत करना जरूरी है।

इस बीच, पानी के मीटरों के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं। तदर्थ आवास समिति के सदस्य विशाल मोहिते ने बताया कि कुछ महीने पहले लगाए गए पानी के मीटरों ने काम करना बंद कर दिया है। इसके कारण प्रतिदिन कितनी मात्रा में पानी की आपूर्ति हो रही है, इसका सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

मोहिते के अनुसार, शुरुआती दिनों की रीडिंग से पता चलता है कि परिसर में प्रतिदिन 7 लाख लीटर तक पानी मिल रहा था, लेकिन इसके बाद आपूर्ति में भारी गिरावट आई है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए MHADA के मुंबई बोर्ड के मुख्य अधिकारी मिलिंद बोरिकर से संपर्क करने के प्रयास किए गए, लेकिन उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।

नए घरों में रहने के बावजूद पानी के लिए संघर्ष कर रहे BDD चॉल के निवासियों की समस्या अब भी बनी हुई है। पर्याप्त जलापूर्ति, पाइपलाइन नेटवर्क को मजबूत करने और पानी की वास्तविक आपूर्ति का हिसाब रखने से जुड़े सवालों के बीच स्थायी समाधान का इंतजार जारी है।

Pratahkal Bureau

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