मुंबई में बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। लोअर परेल स्थित एन.एम. जोशी मार्ग बीडीडी चॉल के 557 परिवारों को अब नए और बड़े घरों की चाबियां सौंप दी गई हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यशवंतराव चव्हाण सेंटर में आयोजित समारोह में लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां और कब्जा पत्र प्रदान किए। दशकों से करीब 160 वर्गफुट के सीमित आवासों में रहने वाले इन परिवारों को अब 500 वर्गफुट के घर मिले हैं। महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) की महत्वाकांक्षी बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना के तहत यह उपलब्धि हासिल हुई है।

मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में आयोजित विशेष समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना के पहले चरण में पूरी हुई तीन पुनर्वास इमारतों के 557 पात्र निवासियों को नए घरों का लाभ प्रदान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतीकात्मक रूप से 11 निवासियों को घरों की चाबियां और कब्जा पत्र सौंपे।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता है कि मुंबई के मूल निवासी अपने शहर में ही रह सकें और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से अलग न होना पड़े। बीडीडी चॉल पुनर्विकास सहित विभिन्न आवासीय योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों को किफायती, बड़े और बेहतर सुविधाओं से युक्त घर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

करीब 160 वर्गफुट के छोटे घरों में दशकों से रहने वाले कई बीडीडी चॉल परिवारों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है। इन घरों में अक्सर दो से तीन पीढ़ियां सीमित जगह में एक साथ रहती थीं। अब 500 वर्गफुट के नए पुनर्वास आवासों में बैठक कक्ष, दो शयनकक्ष और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे परिवारों को पहले की तुलना में अधिक जगह और बेहतर आवासीय परिस्थितियां मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना लंबे समय से लंबित थी। निजी विकासकों के साथ आई कठिनाइयों के बाद सरकार ने म्हाडा को इसकी कार्यान्वयन एजेंसी नियुक्त किया। वर्ष 2017-18 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद इसे आगे बढ़ाया गया।

फडणवीस के अनुसार, निजी विकासकों के बजाय म्हाडा को परियोजना की जिम्मेदारी सौंपने से पुनर्विकास प्रक्रिया को गति देने में मदद मिली। सरकार का उद्देश्य इस तरह की परियोजनाओं को मुनाफा कमाने का माध्यम बनाने के बजाय लोगों को गुणवत्तापूर्ण आवास और बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

बीडीडी चॉल मुंबई के इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। इन चॉलों ने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के साथ-साथ कई सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और श्रमिक आंदोलनों में योगदान दिया है। भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और लोकमान्य तिलक जैसी ऐतिहासिक हस्तियों का भी इन चॉलों से जुड़ाव रहा है। इस परियोजना को एशिया की प्रमुख शहरी पुनर्विकास पहलों में शामिल माना जाता है। इससे हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।

समारोह में मुख्यमंत्री फडणवीस ने बीडीडी चॉल में रहने वाले पात्र पुलिसकर्मियों के आवास का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2011 से पहले चॉलों में रहने वाले पात्र पुलिसकर्मियों को 15 लाख रुपये में घर उपलब्ध कराने का निर्णय बरकरार रहेगा। वहीं, कटऑफ तारीख के बाद चॉलों में रहने आए कुछ पुलिसकर्मी पात्रता से बाहर हो गए थे। ऐसे मामलों में सरकार ने विशेष प्रकरण के रूप में निर्माण लागत पर घर उपलब्ध कराने पर विचार करने का निर्णय लिया है। कीमतों के अंतर और अन्य संबंधित समस्याओं पर चर्चा कर उचित समाधान निकालने के लिए अलग बैठक आयोजित की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एवं आवास मंत्री एकनाथ शिंदे ने म्हाडा के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बीडीडी चॉल पुनर्विकास का शेष कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए और निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा कि पुनर्वास के तहत मिलने वाले घरों की गुणवत्ता और सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए, जितना बिक्री के लिए बनाए जाने वाले आवासों में दिया जाता है।

शिंदे ने क्लस्टर पुनर्विकास के लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस व्यवस्था में निवासियों को केवल नए घर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण आवासीय सुविधाओं वाला परिसर मिलता है। परियोजना में करीब 23 प्रकार की सुविधाएं शामिल हैं। इनमें खुले स्थान, विकसित उद्यान, जिम्नेजियम, फिटनेस सुविधाएं, बच्चों के खेलने के लिए निर्धारित क्षेत्र और बेहतर साझा सुविधाओं के साथ आवासीय बुनियादी ढांचा शामिल है। उन्होंने कहा कि म्हाडा और अन्य सरकारी एजेंसियों को पुनर्विकास परियोजनाएं समय पर पूरी करनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा मजबूत हो सके।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने एन.एम. जोशी मार्ग बीडीडी चॉल पुनर्विकास आंदोलन के दौरान युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए भी राज्य सरकार की ओर से कदम उठाने की घोषणा की। उन्होंने दोहराया कि आम नागरिकों को सरकार की विकास नीतियों के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

शिंदे ने बताया कि विकास नियंत्रण नियमों में किए गए बदलावों से म्हाडा और झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) से जुड़ी कई लंबित पुनर्विकास परियोजनाओं को गति मिली है। इसके साथ ही सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम कर रही है कि पुनर्विकास के दौरान पात्र निवासियों को उनका लंबित किराया भुगतान मिल सके।

म्हाडा के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आईएएस संजीव जायसवाल के नेतृत्व में प्राधिकरण मुंबई में आवास और पुनर्विकास से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। एन.एम. जोशी मार्ग बीडीडी चॉल परियोजना इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहां मौजूदा निवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने के साथ शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। 557 परिवारों को घरों का कब्जा सौंपना राज्य सरकार, आवास विभाग और म्हाडा के बीच समन्वय का भी महत्वपूर्ण परिणाम है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने 557 परिवारों के लिए इस अवसर को यादगार बताया। उन्होंने कहा कि धनतेरस और दीपावली के त्योहारों के दौरान नए घरों की चाबियां मिलना लाभार्थी परिवारों के लिए इसे और भी विशेष बनाता है। उन्होंने पिछले वर्ष आयोजित बीडीडी चॉल आवास हस्तांतरण समारोह को भी याद किया, जिसका नेतृत्व दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने किया था।

सुनेत्रा पवार ने कहा कि मुंबई के विकास में योगदान देने वाले श्रमिकों, मध्यमवर्गीय परिवारों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने नए घरों में प्रवेश करने वाले परिवारों से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। इसमें बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात भी शामिल रही।

उन्होंने बीडीडी चॉल की सामुदायिक एकता का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाई पृष्ठभूमि के लोग लंबे समय से आपसी सौहार्द के साथ रहते आए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई इमारतों में भी निवासी मित्रता, सहयोग और मिल-जुलकर त्योहार मनाने की परंपरा को बनाए रखेंगे।

विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहिर ने बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना को गति देने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इसे म्हाडा की प्रमुख परियोजना बताते हुए कहा कि इससे प्राधिकरण की निर्माण गुणवत्ता को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ा है। परियोजना की प्रगति से कामाठीपुरा और उमरखाड़ी जैसे क्षेत्रों में पुनर्विकास की पहलों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

अहिर ने बढ़ती आबादी के कारण वर्ली में सड़कों और जलापूर्ति व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने फेमस स्टूडियोज क्षेत्र को एन.एम. जोशी मार्ग से जोड़ने वाले फ्लाईओवर का प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार, इस संपर्क मार्ग के बनने से वर्ली के निवासियों को सात रास्ता और आर्थर रोड नाका होकर आवागमन करने की आवश्यकता कम हो सकती है। उन्होंने इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए मुंबई नगर निगम से भी सहयोग मांगा।

एन.एम. जोशी मार्ग बीडीडी चॉल के 557 परिवारों को नए घरों का कब्जा मिलना मुंबई के शहरी पुनर्विकास अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव है। दशकों तक छोटे आवासों में रहने वाले परिवारों को अब अधिक जगह, बेहतर सुविधाओं और उन्नत आवासीय वातावरण का लाभ मिलेगा। मुंबई के अन्य क्षेत्रों में भी पुनर्विकास कार्य जारी रहने के बीच यह परियोजना लंबे समय से शहर में रह रहे मूल निवासियों को आधुनिक आवास उपलब्ध कराने और उन्हें अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहने का अवसर देने की दिशा में अहम साबित हो रही है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story