मनीषा जेजूरकर मृत्यु मामला: पति डॉ. नीलेश और स्वाती चव्हाण न्यायिक हिरासत में
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे, डिजिटल साक्ष्यों की रिपोर्ट मिलने के बाद दोबारा पुलिस कस्टडी की मांग संभव।

डॉ. मनीषा जेजूरकर के मृत्यु प्रकरण में संदिग्ध डॉ. नीलेश जेजूरकर और डॉ. स्वाती चव्हाण को न्यायालय ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। न्यायिक हिरासत के आदेश के बाद दोनों को नाशिकरोड मध्यवर्ती कारागार भेज दिया गया। जांच के दौरान पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
डॉ. नीलेश जेजूरकर, डॉ. मनीषा के पति हैं। उनके खिलाफ पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की शिकायत में डॉ. स्वाती चव्हाण के नाम का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस ने दोनों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद न्यायालय ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
जांच एजेंसी ने डॉ. नीलेश और डॉ. स्वाती के मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल फोन में मौजूद बातचीत, चैटिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की जांच के लिए पुलिस द्वारा दोबारा पुलिस हिरासत की मांग किए जाने की संभावना है।
पुलिस के अनुसार, डॉ. नीलेश चार दिन और डॉ. स्वाती एक दिन पुलिस हिरासत में थीं। पूछताछ के दौरान अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात पुलिस ने न्यायालय में कही। हालांकि, जांच में लगाए गए आरोप और दावे अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
गंगापुर रोड क्षेत्र स्थित रेवती ब्ल्यू अपार्टमेंट में 6 मार्च 2026 को डॉ. मनीषा जेजूरकर की मृत्यु हुई थी। उनकी बहन रोहिणी थोरात की शिकायत पर डॉ. नीलेश जेजूरकर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में डॉ. मनीषा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही, शिकायत में डॉ. नीलेश और डॉ. स्वाती के संबंधों का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है।
इस मामले में डॉ. नीलेश जेजूरकर ने गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिए न्यायालयीन लड़ाई लड़ी थी। नाशिक न्यायालय के बाद मुंबई उच्च न्यायालय ने भी उनका आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी 17 सितंबर को उनके आवेदन में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया।
मुंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान मामले की कुछ परिस्थितियों पर गंभीर टिप्पणियां दर्ज की गई थीं। कुछ परिस्थितियों के कारण यह सवाल न्यायालय के सामने आया था कि मामला केवल आत्महत्या के लिए उकसाने तक सीमित है या इसके आगे भी जांच की आवश्यकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्पष्ट होगा।
अब इस मामले में मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों और अन्य फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट पर ध्यान है। संबंधित रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की अगली दिशा स्पष्ट होने की बात पुलिस ने न्यायालय में कही है। ऐसे में फॉरेंसिक रिपोर्ट इस प्रकरण की आगे की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।

Pratahkal Bureau
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