लातूर में बड़ा सियासी उलटफेर: ऐन वक्त पर कांग्रेस प्रत्याशी अंजना चौधरी ने वापस लिया नामांकन, भाजपा में भी हलचल
लातूर जिला परिषद चुनाव में बड़ा राजनीतिक धमाका! तांबाला समूह से कांग्रेस प्रत्याशी अंजना चौधरी ने 'किडनैपिंग' के आरोपों के बीच नाटकीय ढंग से नामांकन वापस लिया। वहीं पानगांव में भाजपा के ऋषीकेश कराड की जगह अब सतीश अंबेकर ठोकेंगे चुनावी ताल। जानें निलंगा और रेणापुर की इस हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामे की पूरी कहानी और इसके दूरगामी परिणाम।

लातूर। महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति के रणक्षेत्र लातूर में आज एक ऐसा नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला जिसने कांग्रेस के पैरों तले जमीन खिसका दी है। निलंगा तालुका के तांबाला जिला परिषद समूह में कांग्रेस को उस वक्त गहरा झटका लगा, जब पिछले तीन दिनों से 'लापता' बताई जा रही पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार अंजना सुनील चौधरी ने अचानक प्रकट होकर अपना नामांकन वापस ले लिया। इस अप्रत्याशित कदम ने न केवल कांग्रेस की रणनीतियों को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि पूरे जिले के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
घटनाक्रम की शुरुआत पिछले शनिवार को हुई थी, जब अंजना सुनील चौधरी अचानक 'नॉट-रीचेबल' हो गईं। उनके रहस्यमयी ढंग से गायब होने के बाद कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके उम्मीदवार का 'अपहरण' कर लिया गया है। हालांकि, आज 27 जनवरी को नामांकन वापसी के अंतिम दिन, अंजना चौधरी भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच चुनाव कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए अपना नाम वापस ले लिया, जिससे कांग्रेस के पास अब इस सीट पर कोई आधिकारिक चेहरा नहीं बचा है। तांबाला निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है, और चुनाव के इस निर्णायक मोड़ पर उम्मीदवार के पीछे हटने से कांग्रेस की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है।
सियासी उठापटक का यह सिलसिला केवल कांग्रेस तक ही सीमित नहीं रहा। रेणापुर तालुका के पानगांव जिला परिषद समूह में भी भाजपा के भीतर बड़े बदलाव देखने को मिले। भाजपा के घोषित उम्मीदवार ऋषीकेश रमेश कराड ने अप्रत्याशित रूप से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। हालांकि, भाजपा ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए कराड की जगह सतीश अंबेकर को चुनावी मैदान में उतारकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
आज शाम तक सभी शेष उम्मीदवारों को चुनाव चिह्नों का आवंटन कर दिया जाएगा, जिसके बाद चुनावी मुकाबले की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। तांबाला और पानगांव की इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लातूर की जिला परिषद की लड़ाई अब केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि शह-मात के इस खेल में कौन कितना माहिर है, इस पर टिकी है। कांग्रेस के लिए यह हार से पहले एक बड़े मनोवैज्ञानिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।

Limbraj Panhalkar (Latur)
नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर
वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)
कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)
बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग
अनुभव: 20 साल
परिचय
लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
