महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (MahaRERA) ने कहा है कि उसके पास Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 के तहत यह तय करने का अधिकार नहीं है कि महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) फ्लैट का कब्जा सौंपे जाने से पहले की अवधि का प्रॉपर्टी टैक्स होमबायर से वसूल सकती है या नहीं। यह टिप्पणी पिंपरी-चिंचवड़ के ताथवड़े स्थित MHADA के एक फ्लैट से जुड़े मामले में आई, जहां खरीदारों ने कब्जे से पहले लगाए गए प्रॉपर्टी टैक्स की वापसी की मांग की थी। Hindustan Times

मामला पुणे हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के ताथवड़े स्थित MHADA प्रोजेक्ट का है। दो होमबायर्स ने MHADA की First Come First Serve (FCFS) योजना के तहत ready-to-move-in apartment खरीदा था। खरीदारों ने आरोप लगाया कि MHADA ने उनसे 7 अगस्त 2023 से 31 मार्च 2025 की अवधि के लिए ₹19,500 प्रॉपर्टी टैक्स के तौर पर वसूले, जबकि फ्लैट का कब्जा 12 मार्च 2025 को ऑफर किया गया था। इसके बाद 16 अप्रैल 2025 को उन्हें भौतिक कब्जा दिया गया। Hindustan Times

खरीदारों का तर्क था कि जिस अवधि में फ्लैट उनके कब्जे में नहीं था, उस अवधि का प्रॉपर्टी टैक्स उन्हें नहीं देना चाहिए। उन्होंने शुरुआत में प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस से जुड़े शुल्क के रूप में ₹47,210 की वापसी, ब्याज और अन्य राहत की मांग की थी। कार्यवाही के दौरान सुलह और मध्यस्थता के बाद ₹30,000 की मेंटेनेंस राशि के समायोजन की बात सामने आई। इसके बाद विवाद प्रॉपर्टी टैक्स तक सीमित रह गया और शिकायतकर्ताओं ने कब्जे से पहले की अवधि के लिए ₹18,860 वापस करने की मांग की। Hindustan Times

MHADA ने इसका विरोध करते हुए कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस शुल्क की जानकारी पहले ही होमबायर्स को दिए गए offer letter और उनके हस्ताक्षर वाले possession slip में दी गई थी। possession slip में 7 अगस्त 2023 से 31 मार्च 2025 तक की अवधि के प्रॉपर्टी टैक्स और 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक के मेंटेनेंस शुल्क का उल्लेख था। Hindustan Times

खरीदारों ने 6 जनवरी 2025 को घोषित एक नीति का भी हवाला दिया था। उनका कहना था कि इस नीति के अनुसार प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान कब्जा मिलने के बाद मालिक की जिम्मेदारी होना चाहिए। MHADA ने MahaRERA को बताया कि इस नीति के आधार पर कोई circular जारी नहीं किया गया था, इसलिए शिकायतकर्ता उस पर भरोसा नहीं कर सकते।

प्राधिकरण के आदेश में यह भी दर्ज है कि फ्लैट 22 दिसंबर 2024 को बुक किया गया था, यानी नीति की घोषणा से पहले। वहीं offer letter दिसंबर 2024 में बाद में जारी किया गया था। MHADA का तर्क था कि इसके बावजूद प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े शुल्क offer letter और possession slip में पहले ही बताए गए थे और खरीदारों ने उन्हें स्वीकार किया था। Hindustan Times

MahaRERA ने इस बात की जांच की कि क्या होमबायर्स की प्रॉपर्टी टैक्स वापसी की मांग RERA Act के तहत स्वीकार की जा सकती है। प्राधिकरण ने कहा कि इस अधिनियम के तहत Sections 12 और 18 में आने वाली परिस्थितियों में refund दिया जा सकता है, लेकिन शिकायतकर्ताओं की प्रॉपर्टी टैक्स वापसी की मांग इनमें से किसी प्रावधान के तहत नहीं आती। Hindustan Times

प्राधिकरण ने यह भी कहा कि खरीदारों ने यह आरोप नहीं लगाया था कि MHADA ने सहमत समयसीमा के भीतर कब्जा देने में विफलता की, जिससे Section 18 के तहत refund का दावा बन सकता था।

MahaRERA ने अपने आदेश में कहा, “It is seen that the relief of the complainant seeking refund of property tax does not fall under any of the provisions of the said Act. As a result, refund sought by the complainants cannot be granted in favour of the complainants." आदेश में आगे कहा गया कि जब यह सवाल हो कि जिस अवधि में शिकायतकर्ता फ्लैट के कब्जे में नहीं थे और फ्लैट MHADA के नियंत्रण में था, उस अवधि का प्रॉपर्टी टैक्स उनसे लिया जा सकता है या नहीं, तो उक्त अधिनियम MahaRERA को इस मुद्दे पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं देता। Hindustan Times

इसके साथ ही MahaRERA ने MHADA के पुणे बोर्ड के खिलाफ दोनों होमबायर्स की शिकायत खारिज कर दी। आदेश ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले में विवादित प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली का सवाल RERA Act के तहत MahaRERA के अधिकार क्षेत्र में तय नहीं किया जा सकता। Hindustan Times

Pratahkal Bureau

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