महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव की गहमागहमी के बीच महायुति गठबंधन ने अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 18 जून को होने वाले मतदान में किसी भी प्रकार की मतफुटी को रोकने और अपने नगरसेवकों को एक सूत्र में पिरोए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने 72 नगरसेवकों को 'सहल' (राजनीतिक कैंप) पर भेज दिया है। यह निर्णय पार्टी नेतृत्व की उस सतर्कता को दर्शाता है, जिसके तहत वह चुनाव से पहले किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। इससे दो दिन पूर्व ही शिवसेना के शिंदे गुट ने भी अपने नगरसेवकों को इसी तरह सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया था।

यह राजनीतिक सतर्कता हालिया घटनाक्रमों के बाद और अधिक बढ़ गई है, जिसमें विशेष रूप से गोकुल गीते और नरेंद्र दराडे के बीच उम्मीदवारी वापसी का नाटकीय घटनाक्रम शामिल है। नामांकन वापसी के शुरुआती दौर में गणेश गीते ने पीछे हटने से इनकार कर दिया था, जिससे महायुति खेमे में बेचैनी बढ़ गई थी। अंततः भाजपा के संकटमोचक माने जाने वाले गिरीश महाजन और शिवसेना के संपर्क नेता उदय सामंत के हस्तक्षेप तथा परिवार के दबाव के बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस लिया। हालांकि, अपनी वापसी के बावजूद गोकुल गीते ने नरेंद्र दराडे के समर्थन पर चुप्पी साधे रखी, जिससे पार्टी नेतृत्व की चिंताएं कम नहीं हुईं।

यही कारण है कि भाजपा और शिवसेना दोनों ही अब अपनी चुनावी बिसात पूरी तरह सुरक्षित करना चाहते हैं। जहां भाजपा और शिंदे सेना ने अपने नगरसेवकों की घेराबंदी मजबूत कर ली है, वहीं गठबंधन के तीसरे घटक दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नगरसेवकों की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। महायुति की इस कवायद ने विधान परिषद चुनाव को बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण बना दिया है, जहां अब सबकी निगाहें 18 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हैं कि क्या यह एकजुटता वोटों में तब्दील हो पाती है या फिर कोई नया समीकरण उभरकर सामने आता है।

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Pratahkal Newsroom

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