महाराष्ट्र में जातिवार जनगणना, आरक्षण व्यवस्था की नियमित समीक्षा और शिक्षा एवं रोजगार में समान अवसरों का मुद्दा उठाते हुए महाराष्ट्र OBC युवा आघाड़ी ने केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष व्यापक नीतिगत सुधारों की मांग रखी है। आघाड़ी की अध्यक्षा प्रतिक्षा तारासिंग चव्हाण ने माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री तथा संबंधित केंद्रीय और राज्य मंत्रियों को विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत कर देश की सभी जातियों और उपजातियों की आधिकारिक जनगणना कराने सहित 14 प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया है।

ज्ञापन में जातिवार जनगणना को केवल SC, ST और OBC वर्गों तक सीमित नहीं रखने, बल्कि देश की सभी जातियों, उपजातियों और अलग सामाजिक पहचान रखने वाले समुदायों को इसमें शामिल करने की मांग की गई है। इसके तहत जनसंख्या, आयु वर्ग, लिंग, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से संबंधित आंकड़े गांव, शहर, तहसील, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है।

आघाड़ी ने जनगणना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए दोहरी प्रविष्टियों और गलत जानकारियों को रोकने वाली सुरक्षित डिजिटल सत्यापन प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया है। इसके लिए आधार, PAN, जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र के उपयोग की कानूनी व्यवहार्यता की जांच करने तथा नागरिकों की गोपनीयता सुरक्षित रखने की मांग की गई है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि आधार या PAN उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी नागरिक को जनगणना से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक किए बिना समेकित आंकड़े उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

जातिवार जनगणना के आंकड़ों की प्रमाणिकता जांचने के लिए सांख्यिकी विशेषज्ञों, सामाजिक वैज्ञानिकों, कानून विशेषज्ञों, सूचना सुरक्षा विशेषज्ञों और संबंधित समाजों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए स्वतंत्र सत्यापन तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी ज्ञापन में शामिल है। इस व्यवस्था के तहत डेटा की गुणवत्ता, दोहरी प्रविष्टियों, क्षेत्रीय सत्यापन और त्रुटियों में सुधार से संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

महाराष्ट्र OBC युवा आघाड़ी ने प्रत्येक दो वर्ष में देश के सभी समाजों की सामाजिक और शैक्षणिक परिस्थितियों की आधिकारिक समीक्षा कराने की मांग की है। इसमें शैक्षणिक प्रगति, रोजगार में भागीदारी, सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन शामिल होगा। इसके लिए हर दो वर्ष में संपूर्ण जनगणना कराने के बजाय आधिकारिक जनगणना, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और प्रमाणित नमूना सर्वेक्षणों के आधार पर नियमित समीक्षा व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

ज्ञापन में SC, ST और OBC वर्गों की विभिन्न जातियों की सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति तथा सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व की जांच कर आवश्यकता के अनुसार A, B, C, D या अन्य उपयुक्त उपवर्गीकरण पर विचार करने की मांग की गई है। आघाड़ी का सुझाव है कि किसी भी जाति को केवल जनसंख्या के अनुपात के आधार पर आरक्षण देने के बजाय ऐतिहासिक वंचना, सामाजिक पिछड़ेपन, शैक्षणिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को आधार बनाया जाए। वहीं, EWS वर्ग की स्वतंत्र संवैधानिक एवं कानूनी मानदंडों के अनुरूप समीक्षा करने की मांग भी रखी गई है।

आरक्षण व्यवस्था को आंकड़ों पर आधारित और गतिशील बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। ज्ञापन के अनुसार आरक्षण नीति राजनीतिक मांगों या अनुमानों के बजाय जनसंख्या, सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन, ऐतिहासिक वंचना और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व के सत्यापित आंकड़ों के आधार पर तैयार की जानी चाहिए। इसकी प्रत्येक दो वर्ष में समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षण में किसी भी बदलाव को आयोग की रिपोर्ट, कानूनी प्रक्रिया, सार्वजनिक आपत्तियों और संवैधानिक प्रावधानों का पालन करने के बाद ही लागू करने का सुझाव दिया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में आघाड़ी ने देश के प्रत्येक बालक और बालिका को LKG से PhD तक निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक निधि और राज्यवार बजटीय कार्ययोजना तैयार करने का प्रस्ताव दिया गया है। शिक्षा शुल्क के अतिरिक्त विद्यार्थियों को पुस्तकें, यूनिफॉर्म, परिवहन, छात्रावास, डिजिटल शिक्षा सुविधाएं, अनुसंधान अनुदान और पात्र विद्यार्थियों के लिए फेलोशिप उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

देशभर में शिक्षा का स्तर समान करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय न्यूनतम शैक्षणिक मानक, पाठ्यक्रम में समन्वय, डिग्रियों की समकक्षता और क्रेडिट ट्रांसफर प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही एक केंद्रीय शैक्षणिक बोर्ड और एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव की संवैधानिक एवं प्रशासनिक व्यवहार्यता का अध्ययन करने की मांग रखी गई है।

स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को भी ज्ञापन में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। प्रत्येक राज्य की स्थानीय भाषा को शिक्षा में उचित स्थान देने और महाराष्ट्र में मराठी भाषा के पढ़ने, लिखने, समझने तथा व्यवहारिक उपयोग को मजबूत बनाने की मांग की गई है। इसके साथ हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने के अवसर बनाए रखने का सुझाव दिया गया है।

रोजगार के मुद्दे पर आघाड़ी ने जिला, तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों के योग्य युवाओं को सरकारी नौकरियों में अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है। वर्ग-2 और उससे नीचे के पदों पर भर्ती में स्थानीय भाषा, स्थानीय परिस्थितियों के ज्ञान और सार्वजनिक सेवा की आवश्यकताओं को कानूनी दायरे में ध्यान में रखने का प्रस्ताव दिया गया है। वर्ग-1 के पदों पर भी राज्य के योग्य युवाओं के अवसर बढ़ाने के लिए प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण और स्थानीय प्रतिभा विकास कार्यक्रम संचालित करने की मांग की गई है। इन सभी निर्णयों को संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 और लागू भर्ती नियमों के अधीन रखने की बात कही गई है।

सरकारी ठेकों और विकास कार्यों में स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME), उद्यमियों तथा कुशल श्रमिकों को अधिक अवसर देने के लिए पारदर्शी नीति बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इसके तहत स्थानीय कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार सृजन को निविदाओं में वस्तुनिष्ठ मानदंडों के माध्यम से प्रोत्साहित करने की मांग की गई है।

इन नीतिगत प्रस्तावों को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा प्रत्येक मांग के लिए संबंधित विभाग, जिम्मेदार अधिकारी, अपेक्षित परिणाम और अंतिम समयसीमा निर्धारित करने पर जोर दिया गया है। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि कौन-सी मांग मौजूदा कानूनों के तहत लागू हो सकती है, किसके लिए नए कानून की आवश्यकता होगी और किन प्रस्तावों के लिए संवैधानिक संशोधन जरूरी हो सकता है।

आघाड़ी ने इन मांगों के क्रियान्वयन के लिए 24 महीने की पांच चरणों वाली कार्ययोजना प्रस्तावित की है। पहले 30 दिनों में ज्ञापन का पंजीकरण, संबंधित विभागों का निर्धारण और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव है। 90 दिनों के भीतर विभागवार कार्ययोजना तैयार करने, 3 से 6 महीने के दौरान विशेषज्ञ समितियों का गठन कर कानूनी एवं वित्तीय व्यवहार्यता का अध्ययन करने तथा 6 से 12 महीने के बीच डेटा सत्यापन, शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, 12 से 24 महीने के दौरान आरक्षण की समीक्षा सहित प्रस्तावित नीतिगत सुधारों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की गई है।

ज्ञापन में जनगणना 2027 के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुरूप जातिवार जानकारी उपलब्ध कराने, उसके सत्यापन और रिपोर्ट प्रकाशित करने की निश्चित समयसीमा सरकार द्वारा घोषित करने की मांग भी शामिल है।

प्रतिक्षा तारासिंग चव्हाण ने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी मांगें किसी एक जाति या समाज के विरोध में नहीं हैं, बल्कि देश के प्रत्येक समाज को न्यायसंगत अवसर दिलाने के उद्देश्य से उठाई गई हैं। उन्होंने कहा कि किस समाज का पिछड़ापन कितना है, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उसकी कितनी भागीदारी है तथा किस समाज को विकास के अवसरों की आवश्यकता है, इसका निर्धारण राजनीतिक अनुमानों के बजाय आधिकारिक और सत्यापित आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल राजनीतिक घोषणा बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की प्रभावी व्यवस्था बनना चाहिए। किसी भी समाज को स्थायी रूप से विकास से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए और न ही केवल राजनीतिक दबाव के कारण किसी समाज को लाभ दिया जाना चाहिए। प्रत्येक निर्णय का आधार संविधान, वस्तुनिष्ठ जानकारी और न्यायसंगत मानदंड होने चाहिए।

चव्हाण के अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी को आर्थिक कठिनाइयों के बिना शिक्षा, प्रत्येक योग्य युवा को रोजगार का अवसर और प्रत्येक समाज को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने इसे महाराष्ट्र OBC युवा आघाड़ी का उद्देश्य और भूमिका बताया।

ज्ञापन के अंत में सरकार से 30 दिनों के भीतर प्रारंभिक लिखित जवाब देने और 90 दिनों के भीतर विभागवार कार्ययोजना प्रस्तुत करने की मांग की गई है। साथ ही प्रत्येक मांग के लिए निश्चित समयसीमा घोषित करने तथा महाराष्ट्र OBC युवा आघाड़ी के प्रतिनिधियों को इस विषय पर चर्चा के लिए आधिकारिक बैठक का अवसर देने का आग्रह किया गया है।

यह विस्तृत ज्ञापन महाराष्ट्र OBC युवा आघाड़ी की अध्यक्षा प्रतिक्षा तारासिंग चव्हाण की ओर से प्रस्तुत किया गया है। ज्ञापन में संपर्क के लिए मोबाइल नंबर +91-8805857382 दिया गया है। आघाड़ी ने जातिवार जनगणना, शिक्षा, रोजगार और आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार से समयबद्ध एवं पारदर्शी निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।

Pratahkal Bureau

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