सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मॉडल पर लगेंगे एमआरआय, पोर्टेबल मशीनों के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति
महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में अब पीपीपी मॉडल पर मिलेंगी अत्याधुनिक एमआरआय सुविधाएं। मंत्री हसन मुश्रीफ ने पोर्टेबल एमआरआय की सीमाओं पर क्या दी जानकारी और क्या है सरकार की आगामी योजना? जानिए पूरी खबर इस रिपोर्ट में।

महाराष्ट्र के शासकीय अस्पतालों में एमआरआय सेवा को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा मरीजों को अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के शासकीय अस्पतालों में अब पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के आधार पर एमआरआय यंत्र कार्यान्वित किए जाएंगे। राज्य के मानसून सत्र के दौरान वैद्यकीय शिक्षण मंत्री हसन मुश्रीफ ने यह जानकारी दी। कोल्हापुर के पत्रकार विजय मोरबाळे की रिपोर्ट के अनुसार, विधान परिषद में नियम ९२ के तहत विधायक सतेज डी. पाटील, अभिजित गोविंदराव वंजारी और अशोक अर्जुनराव जगताप द्वारा प्रस्तुत अर्धा तास चर्चा की सूचना का उत्तर देते हुए श्री मुश्रीफ ने यह स्पष्ट किया।
मंत्री ने सदन को बताया कि वर्तमान में राज्य के अधिकांश शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालयों में एमआरआय सेवा उपलब्ध है और कुल १६ संस्थाओं में ये यंत्र मरीजों की सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय अस्पतालों के सभी एमआरआय यंत्र कालबाह्य होने का दावा तथ्यों से परे है और पुराने यंत्रों को चरणबद्ध तरीके से नई अत्याधुनिक मशीनों से बदला जा रहा है। जिन सरकारी संस्थाओं में अभी सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां पीपीपी मॉडल पर सेवा शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। मुंबई क्लस्टर की ७ संस्थाओं के लिए २० दिसंबर २०२५ को 'M/s. Spandan Diagnostic Pvt Ltd' को कार्यारंभ आदेश दिए गए हैं, जहां मरीजों को ३५% तक उच्चतम छूट मिलेगी। वहीं नागपुर क्लस्टर की ७ संस्थाओं के लिए २० मई २०२५ को 'M/s. HealthMap Diagnostics Pvt. Ltd.' को आदेश जारी किए गए हैं, जहां १८% की छूट लागू रहेगी।
पोर्टेबल एमआरआय की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मंत्री ने इसकी तकनीकी सीमाओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली पारंपरिक एमआरआय का विकल्प नहीं, बल्कि केवल एक पूरक है जो मुख्य रूप से आईसीयू में मस्तिष्क की तातडी की जांच के लिए उपयुक्त है। रीढ़ की हड्डी, जोड़ों, हृदय या उदर की जांच तथा कंट्रास्ट एमआरआय, एंजियोग्राफी, स्पेक्ट्रोस्कोपी या फंक्शनल एमआरआय जैसी उन्नत जांचों में यह सक्षम नहीं है। पारंपरिक यंत्रों की तुलना में इसकी इमेज क्वालिटी कम होने और अतिरिक्त बुनियादी ढांचे व विशेष प्रशिक्षित जनशक्ति की आवश्यकता के कारण इसे हर जगह लागू करना व्यवहार्य नहीं है। जटिल निदान के लिए पारंपरिक एमआरआय ही अनिवार्य है। अंत में, श्री मुश्रीफ ने घोषणा की कि पोर्टेबल एमआरआय प्रणाली की उपयोगिता और किफायत का गहन अध्ययन करने के लिए राज्य सरकार एक विशेषज्ञ समिति गठित करेगी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही भविष्य की नीति तय की जाएगी।

