शासकीय कर्मचारियों के संप में फूट, जिला परिषद संगठनों का बहिष्कार
विश्वास काटकर के एकतरफा निर्णय के विरोध में जालना जिला परिषद कर्मचारी संघ ने काम जारी रखने का फैसला किया, जिससे आंदोलन की एकजुटता प्रभावित हुई।

जालना जिला परिषद कार्यालय में मंगलवार को सामान्य रूप से कामकाज निपटाते कर्मचारी; संगठनों के बीच मतभेद के कारण जिले में आंदोलन का प्रभाव कम रहा।
महाराष्ट्र में 21 अप्रैल से पुकारे गए शासकीय व निमशासकीय कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन संप की शुरुआत से पहले ही संगठनात्मक मतभेद खुलकर सामने आ गए, जिससे आंदोलन की एकजुटता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे प्राप्त जानकारी के अनुसार, आंदोलन के तीव्र होने के बजाय बिखरने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
जिला परिषद कर्मचारी महासंघ के कर्मचारियों ने सुबह से ही कर्तव्य पर उपस्थित रहकर संप का बहिष्कार किया, जिससे आंदोलन में स्पष्ट विभाजन दिखाई दिया। आरोप है कि राज्य कर्मचारी महासंघ के राज्याध्यक्ष विश्वास काटकर द्वारा लिए गए एकतर्फी निर्णय के कारण विभिन्न कर्मचारी संगठनों के बीच मतभेद उत्पन्न हुए।
जिला परिषद कर्मचारियों के मुद्दों की लगातार अनदेखी और महासंघ के राज्याध्यक्ष उमेशचंद्र चूलबुले को विश्वास में लिए बिना संप की नोटिस जारी किए जाने से असंतोष और बढ़ गया। इसी पृष्ठभूमि में जालना जिला परिषद कर्मचारी महासंघ ने संप से अलग रहने का निर्णय लिया।
इस निर्णय के चलते जिले के ग्रामपंचायत अधिकारी, शिक्षक, प्रशासन विभाग सहित सभी संवर्ग के कर्मचारी 21 अप्रैल के संप में शामिल नहीं हुए। परिणामस्वरूप, जिला परिषद के कर्मचारियों का कामकाज सामान्य और सुचारु रूप से जारी रहा, जिससे आंदोलन की प्रभावशीलता पर सीधा असर पड़ा है।
यह घटनाक्रम न केवल कर्मचारी संगठनों के भीतर बढ़ती असहमति को उजागर करता है, बल्कि राज्यव्यापी आंदोलन की दिशा और प्रभाव पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

Achut D. More(Jalna)
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