कोल्हापुर: महाराष्ट्र में चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले झोलाछाप या बोगस डॉक्टरों पर अंकुश लगाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण आश्वासन देते हुए कहा कि राज्य में हर साल सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से 12,824 नए एमबीबीएस डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। यह बड़ी संख्या आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की रिक्तियों को भरेगी, जिससे बोगस डॉक्टरों के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा और उनकी संख्या में भारी कमी आएगी।

सदन में बोगस डॉक्टरों के संबंध में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री मुश्रीफ ने इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस, एमडी, महाराष्ट्र कौंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (आयुर्वेदिक, यूनानी), बी.ए.एम.एस., बी.एच.एम.एस. और डेंटल जैसे क्षेत्रों में आधिकारिक पंजीकरण न कराने वाले व्यक्ति 'बोगस डॉक्टर' की श्रेणी में आते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में 2015 से 2026 के बीच कुल 89 बोगस डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो इस समस्या के विरुद्ध चल रही कार्रवाई का प्रमाण है।

बोगस डॉक्टरों पर नकेल कसने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन ने कड़े दंड के प्रावधानों की सिफारिश की है। वर्तमान नियमों के अनुसार, अनधिकृत चिकित्सा व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक की कैद या 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना हो सकता है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर अधिनियम-33 के तहत दोषी को दो साल की कैद या दस हजार रुपये का जुर्माना और पुनरावृत्ति होने पर दस साल तक की कैद का भी प्रावधान किया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए 13 दिसंबर 2025 को एक विशेष समिति गठित की गई थी। अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर और तहसीलदार की अध्यक्षता में तालुका स्तर पर समितियां नियुक्त की गई हैं, जो नियमित रूप से बोगस डॉक्टरों की पहचान कर उनके खिलाफ फौजदारी मुकदमे दर्ज करेंगी। वहीं, आम जनता की सुरक्षा के लिए 'नो योर डॉक्टर' पहल शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा क्यूआर कोड आधारित प्रणाली लागू की जा रही है। इस कोड को स्कैन करते ही डॉक्टर की वैधता और पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वर्तमान में महाराष्ट्र में एक लाख चालीस हजार पंजीकृत डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं, और नए डॉक्टरों की निरंतर आवक से राज्य की चिकित्सा व्यवस्था और अधिक सुरक्षित व विश्वसनीय होने की उम्मीद है।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

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सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

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