महाराष्ट्र में सूखे के संकट और खेतों में सूखती फसलों की स्थिति को गिरड के जय बाल दुर्गा मंडल ने अपनी दुर्गा उत्सव की सजावट के माध्यम से दर्शाया है। समुद्रपुर क्षेत्र के गिरड स्थित वार्ड क्रमांक 3, महादेवपुरा में मंडल की ओर से तैयार की गई यह सजावट क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें सूखे को राक्षस के रूप में दिखाया गया है, जिसके संहार और संकट से किसानों को बाहर निकालने के लिए श्रद्धालु मां दुर्गा से प्रार्थना कर रहे हैं।

गिरड के वार्ड क्रमांक 3, महादेवपुरा में जय बाल दुर्गा मंडल की ओर से पिछले 40 वर्षों से लगातार भव्य रूप में दुर्गा उत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। मंडल की सजावट हर वर्ष दूसरों से अलग रहती है। इस वर्ष सजावट के माध्यम से कोरड़वाहू क्षेत्र में सूखे की गंभीर स्थिति और किसानों के सामने खड़ी चुनौतियों को दर्शाया गया है।

वर्तमान में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में सूखे के संकट के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बारिश के अभाव में किसानों ने खेतों में मेहनत से लगाई गई सोयाबीन, कपास और अरहर की फसलें सूखकर मुरझा रही हैं। अपनी आंखों के सामने फसलों को बर्बाद होते देखकर किसानों के आंसू छलक रहे हैं।

किसानों ने इधर-उधर से कर्ज लेकर अपनी जमा-पूंजी और उपलब्ध संसाधन खेती में लगा दिए थे। इसके बावजूद फसल तैयार होने के समय सूखे के संकट ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसलों की यह स्थिति किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

जय बाल दुर्गा मंडल ने इसी परिस्थिति को अपनी सजावट में स्थान दिया है। सूखे के राक्षस के रूप में प्रस्तुत इस दृश्य के माध्यम से क्षेत्र में व्याप्त संकट को सामने लाया गया है। यह सजावट आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और मां दुर्गा के भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

मंडल के पदाधिकारी और श्रद्धालु मां दुर्गा से प्रार्थना कर रहे हैं कि वह सूखे रूपी राक्षस का संहार कर संकट में फंसे किसानों को राहत दें और बलीराजा को इस कठिन परिस्थिति से बाहर निकालने में सहायक हों। इस तरह गिरड में दुर्गा उत्सव की सजावट के माध्यम से सूखे की मार झेल रहे किसानों की स्थिति और उनके लिए राहत की प्रार्थना को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

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