Sawantwadi Railway Station Name Change : महाराष्ट्र की राजनीति और बुनियादी ढांचे के इतिहास में मंगलवार का दिन एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। राज्य मंत्रिमंडल ने कोंकण रेलवे नेटवर्क के विकास में अद्वितीय योगदान देने वाले पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और दिग्गज समाजवादी नेता स्वर्गीय मधु दंडवते को एक बड़ा सम्मान देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मंत्रिमंडल ने सिंधुदुर्ग जिले में स्थित सावंतवाड़ी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर 'लोकमान्य मधु दंडवते रेलवे टर्मिनस' रखने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही, इस हाई-प्रोफाइल बैठक में डोंबिवली स्थित श्री पिंपलेश्वर देवस्थान मंदिर ट्रस्ट की भूमि से जुड़े एक और संवेदनशील व महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

कोंकण रेलवे के 'सूत्रधार' को मिला ऐतिहासिक सम्मान :

सावंतवाड़ी स्टेशन का नाम बदलने का यह निर्णय महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कोंकण क्षेत्र के लाखों लोगों की उस गहरी भावना और लंबे समय से चली आ रही मांग का सम्मान है, जो इस परियोजना को धरातल पर उतारने वाले नायक के प्रति थी। केंद्रीय वित्त और रेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके मधु दंडवते को कोंकण रेलवे का असली सूत्रधार और दूरदर्शी वास्तुकार माना जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि इस अनुभवी समाजवादी नेता ने कोंकण क्षेत्र की रेलवे कनेक्टिविटी से जुड़े जटिल मुद्दों का न केवल पुरजोर समर्थन किया, बल्कि दशकों से लंबित पड़ी कोंकण रेलवे परियोजना को अपनी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से आगे बढ़ाया।

आपातकाल के काले दौर में जेल की सलाखों के पीछे वक्त गुजारने वाले प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के इस कद्दावर नेता ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में जो मील के पत्थर स्थापित किए, उन्हें आज भी याद किया जाता है। वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार में रेल मंत्री बनते ही उन्होंने रेलवे आरक्षण प्रणाली के कम्प्यूटरीकरण की शुरुआत की थी, जिसने बुकिंग क्लर्कों के स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार की कमर तोड़ दी थी। इसके अलावा, आम यात्रियों की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए स्लीपर कोचों में लकड़ी के कठोर बर्थों को हटाकर गद्देदार बर्थ (Cushioned Berths) लगाने का क्रांतिकारी निर्णय भी उन्हीं का था। उन्होंने ही 1978-79 में आप्टा-रोहा लाइन के साथ कोंकण रेलवे परियोजना के पहले चरण को आधिकारिक मंजूरी दी थी।

दिल्ली भेजी जाएगी फाइल: ये होगी कानूनी प्रक्रिया

राज्य कैबिनेट से इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य सरकार इस नाम परिवर्तन के औपचारिक प्रस्ताव को अंतिम मुहर के लिए केंद्र सरकार के पास भेजेगी। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस फाइल को केंद्रीय गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय को भेजा जा रहा है। केंद्र सरकार से अंतिम एनओसी (NOC) और औपचारिक हरी झंडी मिलते ही इस रेलवे स्टेशन का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर 'लोकमान्य मधु दंडवते रेलवे टर्मिनस' कर दिया जाएगा।

डोंबिवली पिंपलेश्वर मंदिर ट्रस्ट की ४.२५ एकड़ भूमि नियमित :

इसी बैठक में मंत्रिमंडल ने एक और बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए डोंबिवली के औद्योगिक क्षेत्र (सागांव-सोनारपाड़ा) में स्थित श्री पिंपलेश्वर देवस्थान मंदिर ट्रस्ट को एक बड़ी राहत दी है। ट्रस्ट के कब्जे वाली करीब 4.25 एकड़ भूमि, जिसे पहले तकनीकी रूप से अतिक्रमण की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया था, उस पर बनी सभी धार्मिक और सामाजिक संरचनाओं को सरकार ने नियमित (Regularize) करने का फैसला किया है। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) के माध्यम से आए इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कैबिनेट ने इस पूरी भूमि को नाममात्र की दरों पर ट्रस्ट को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है।

हालांकि, सरकार ने इस फैसले के साथ एक कड़ा कानूनी रुख भी स्पष्ट किया है। कैबिनेट ने साफ किया है कि इस निर्णय को भविष्य के लिए कोई मिसाल (Precedent) न माना जाए। इसके साथ ही सरकार ने एमआईडीसी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपनी जमीनों पर होने वाले अतिक्रमणों से निपटने के लिए एक सख्त और व्यापक नीति तैयार करे ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोका जा सके।

दूरगामी प्रभाव और क्षेत्रीय भावना की जीत :

मंत्रिमंडल के ये दोनों फैसले राज्य के विकास और सांस्कृतिक विरासत को संतुलित करने की दिशा में बड़े कदम हैं। जहाँ एक तरफ डोंबिवली में स्थानीय धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव को भूमि नियमितीकरण के जरिए सुरक्षा दी गई है, वहीं दूसरी तरफ सावंतवाड़ी स्टेशन का नामकरण कोंकण के विकास पुरुष को दी गई एक सच्ची और भावभीनी श्रद्धांजलि है। यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाएगा कि कोंकण की दुर्गम पहाड़ियों को चीरकर दौड़ने वाली रेल के पीछे मधु दंडवते जैसी महान शख्सियत का कितना अथक संघर्ष छिपा था।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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