महाराष्ट्र में 10 नए सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों को मंजूरी, 2,300 से अधिक सीटें बढ़ेंगी
नए सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेज, जीएनएम स्कूलों के उन्नयन और सीटों में बड़ी बढ़ोतरी के फैसले से महाराष्ट्र में स्वास्थ्य शिक्षा को मिलेगा नया विस्तार।

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त बनाने और नर्सिंग शिक्षा का विस्तार कर विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य में 10 नए सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही आठ सरकारी जीएनएम नर्सिंग स्कूलों का बीएससी नर्सिंग कॉलेजों में उन्नयन किया जाएगा, जबकि पांच मौजूदा सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश क्षमता 50 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। इस निर्णय से राज्य में नर्सिंग शिक्षा की 2,300 से अधिक नई सीटें उपलब्ध होंगी। यह जानकारी राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने दी।
राज्य सरकार द्वारा 7 जुलाई 2026 को जारी शासन निर्णय के अनुसार इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए राज्य और केंद्र सरकार के माध्यम से कुल 558.71 करोड़ रुपये के अनावर्ती व्यय को मंजूरी दी गई है। प्रशिक्षित नर्सों की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी।
नए सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेज चंद्रपुर, सिंधुदुर्ग, यवतमाल, अलीबाग (रायगढ़), रत्नागिरी, अमरावती, धाराशिव, गडचिरोली, पालघर और अहिल्यानगर जिलों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों की क्षमता के साथ शुरू किए जाएंगे। इससे राज्य में एक हजार नई प्रवेश सीटें उपलब्ध होंगी।
इसके अलावा मुंबई के जी.टी. अस्पताल, सेंट जॉर्जेस अस्पताल तथा धुले, सोलापुर, अंबाजोगाई, अकोला, नागपुर और सांगली स्थित आठ सरकारी जीएनएम नर्सिंग स्कूलों का उन्नयन कर वहां बीएससी नर्सिंग कॉलेज शुरू किए जाएंगे। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की विशेष योजना के तहत प्रत्येक महाविद्यालय को सात करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुंबई, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे और नांदेड़ स्थित मौजूदा सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश क्षमता 50 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। इससे राज्य में 250 अतिरिक्त सीटों की वृद्धि होगी।
इन सभी महाविद्यालयों में भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) के मानकों के अनुसार अत्याधुनिक कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, पोषण एवं प्री-क्लिनिकल प्रयोगशालाएं, सुसज्जित पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल तथा विद्यार्थियों के लिए आधुनिक छात्रावास विकसित किए जाएंगे।
इस निर्णय से न केवल नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। प्रत्येक नए महाविद्यालय के लिए प्राचार्य, उपप्राचार्य, प्राध्यापक, ट्यूटर, ग्रंथपाल, कार्यालयीन कर्मचारी, रसोइया और सुरक्षा कर्मियों सहित वर्ग-1 से वर्ग-4 तक के कुल 86 पद स्वीकृत किए गए हैं। इस प्रकार 860 से अधिक नए पदों का सृजन होगा। इन पदों पर नियुक्तियां उच्चस्तरीय सचिव समिति की मंजूरी के बाद संविदा और बाह्य स्रोतों के माध्यम से की जाएंगी।
राज्य सरकार के इस निर्णय से नर्सिंग शिक्षा को नई गति मिलने के साथ ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
