टिटी (धनुर्वात और घटसर्प) वैक्सीन का बूस्टर डोज लेने के बाद 17 वर्षीय किशोरी श्रावणी अनिल पाटील की मौत के मामले में प्राथमिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। सरकार ने डिप्थीरिया और टिटासन दवाओं की निर्धारित बैच पर पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों को संबंधित बैच की वैक्सीन का उपयोग नहीं करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, 24 जून को 17 वर्षीय श्रावणी अनिल पाटील ने धनुर्वात और घटसर्प से बचाव के लिए टिटी वैक्सीन का बूस्टर डोज लिया था। वैक्सीन लगने के कुछ ही समय बाद उसे चक्कर आया और वह गिर पड़ी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। किशोरी के पिता ने अस्पताल की लापरवाही को मौत का कारण बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। घटना के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बैच की वैक्सीन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।

मामले की गहन जांच के लिए वैक्सीन और इंजेक्शन के नमूने राष्ट्रीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं। पूरे महाराष्ट्र में संबंधित बैच की कुल 1,632 वैक्सीन की शीशियां वितरित की गई थीं, जिनमें से 1,360 का उपयोग किया जा चुका है। नाशिक की घटना के बाद शेष 272 शीशियां तत्काल वापस मंगवा ली गई हैं। वैक्सीन लगाने के लिए उपयोग की जाने वाली विशेष सिरिंज और इंजेक्शन की कुल 1,37,600 इकाइयां वितरित की गई थीं, जिनमें से 1,11,200 का उपयोग हो चुका है। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए लगभग 800 नमूने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कसौली (हिमाचल प्रदेश) भेजे गए हैं।

जिस वैक्सीन की शीशी से श्रावणी को डोज दिया गया था, उसी शीशी से पांच अन्य लोगों को भी वैक्सीन लगाई गई थी। हालांकि उन पांचों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। इसी कारण मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए वैक्सीन और इंजेक्शन दोनों के नमूनों की राष्ट्रीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है।

नाशिक महानगरपालिका के चिकित्सा विभाग ने भी मामले की प्राथमिक जांच पूरी कर ली है। विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच में श्रावणी पाटील की मौत का संभावित कारण तीव्र एलर्जिक प्रतिक्रिया माना गया है। हालांकि यह स्पष्ट करने के लिए कि धनुर्वात और घटसर्प रोधी वैक्सीन के कारण ही मौत हुई या नहीं, किशोरी की त्वचा, रक्त और विसरा के नमूने नाशिक तथा छत्रपति संभाजीनगर स्थित फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि हो सकेगी।

कोरोना काल में भी बड़ी संख्या में नागरिकों ने विभिन्न वैक्सीन लगवाई थीं और कई लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की शिकायत की थी। अब टिटी वैक्सीन का बूस्टर डोज लेने के बाद 17 वर्षीय किशोरी की मौत की घटना से नागरिकों में चिंता और भय का माहौल है। इस बीच संबंधित वैक्सीन पर पूरे राज्य में रोक लगाने और मामले में कठोर कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है।

Pratahkal Bureau

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