महाराष्ट्र की राजनीति में आरक्षण को लेकर एक बार फिर बड़ा मुद्दा सामने आया है। हैदराबाद रियासतकालीन ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विधायक बबनराव लोणीकर ने बंजारा और धनगर समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की पुरजोर मांग की है। शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को नागपुर में चल रहे राज्य विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन के दौरान तारांकित प्रश्न के माध्यम से उन्होंने यह विषय सदन के पटल पर रखा।

विधानसभा में बोलते हुए लोणीकर ने कहा कि हैदराबाद गज़ेट में बंजारा और धनगर समाज का उल्लेख आदिवासी समुदाय के रूप में मिलता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब इसी गज़ेट के आधार पर महाराष्ट्र में मराठा समाज को ओबीसी प्रमाणपत्र मिल सकता है, तो उसी न्यायिक और ऐतिहासिक आधार पर बंजारा समाज को भी एसटी श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक सहित कई अन्य राज्यों में बंजारा समाज को पहले से ही अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।

धनगर और धनगड को एक ही समाज बताते हुए लोणीकर ने स्पष्ट किया कि ‘धनगड’ शब्द केवल वर्तनी की त्रुटि है, न कि अलग समुदाय। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में धनगड समाज को अनुसूचित जनजाति का लाभ मिल रहा है, जबकि महाराष्ट्र में धनगर समाज अब भी इस अधिकार से वंचित है, जो एक गंभीर सामाजिक अन्याय है।

लोणीकर ने सदन को यह भी अवगत कराया कि बंजारा और धनगर समाज आज भी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के कई मोर्चों पर पिछड़े हुए हैं। यदि इन्हें अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग में शामिल किया जाता है, तो यह समाज मुख्यधारा से जुड़कर अपने सर्वांगीण विकास की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

इस मुद्दे पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने बताया कि मामले की गहन समीक्षा के लिए समितियों का गठन किया गया है। धनगर समाज की मांगों पर अध्ययन के लिए सुधाकर शिंदे की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, जबकि बंजारा समाज के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अलग समिति गठित की गई है। दोनों समितियों को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके बाद राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

इधर, बंजारा और धनगर समाज की विभिन्न संगठनों और समाजबंधुओं ने विधायक बबनराव लोणीकर को फोन कर उनका आभार जताया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से लंबित इस न्यायसंगत मांग को विधानसभा में मजबूती से उठाकर लोणीकर ने उनके संघर्ष को एक नई आवाज दी है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य की सामाजिक राजनीति पर गहराई से देखने को मिल सकता है।

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