चंद्रपुर ज़िले के नागभीड़ तालुका स्थित मिंथुर गांव से सामने आई यह घटना कर्ज़, अवैध साहूकारी और प्रशासनिक लापरवाही की एक भयावह तस्वीर पेश करती है। 36 वर्षीय डेयरी व्यवसायी रोशन शिवदास कुले की कहानी उस दर्दनाक हकीकत को उजागर करती है, जहां आर्थिक संकट और साहूकारों के लगातार दबाव ने एक व्यक्ति को अपनी जान का हिस्सा बेचने तक पर मजबूर कर दिया।

रोशन कुले के पास 12 डेयरी गायें थीं और उन्हीं के सहारे उनका परिवार चलता था। वर्ष 2021 में उनकी गायें लम्पी बीमारी की चपेट में आ गईं। इलाज के बावजूद स्थिति नहीं सुधरी और आर्थिक संकट गहराता चला गया। गायों के उपचार और व्यवसाय को बचाने के लिए रोशन ने 2 फरवरी 2021 को घाटबंधे निवासी साहूकार मनीष पुरुषोत्तम से 1 लाख रुपये ब्याज पर उधार लिए। यही कर्ज़ आगे चलकर उनके जीवन का सबसे बड़ा संकट बन गया।

समय पर रकम न चुका पाने के कारण ब्याज बढ़ता गया और साहूकारों का दबाव भी। रोशन ने एक कर्ज़ चुकाने के लिए दूसरा कर्ज़ लिया, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए। रोशन के अनुसार, पैसे न देने पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। बार-बार भुगतान करने के बावजूद साहूकार लगातार और रकम की मांग करते रहे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 लाख रुपये के मूल कर्ज़ के बदले रोशन ने करीब 50 लाख रुपये तक चुका दिए, फिर भी उत्पीड़न नहीं रुका।

आख़िरकार, कर्ज़ से पीछा छुड़ाने की उम्मीद में रोशन ने एक बेहद खौफनाक फैसला लिया। साहूकारों का पैसा चुकाने के लिए वह कंबोडिया गए और वहां अपनी किडनी बेच दी। इसके बावजूद साहूकारों ने पैसे लेने से इनकार कर दिया और फिर से मांग शुरू कर दी। इस अमानवीय स्थिति से टूट चुके रोशन ने 10 नवंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मामला तब गंभीर मोड़ पर पहुंचा जब मीडिया ने इस प्रकरण को उजागर किया। इसके बाद ब्रह्मपुरी पुलिस ने अवैध साहूकारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मनीष घाटबंधे, किशोर रामभाऊ बावनकुले, लक्ष्मण पुंडलिक उरकुडे, प्रदीप रामभाऊ बावनकुले, संजय विठोबा बल्लारपुरे और सत्यवान रामरतन बोरकर के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की है कि सभी लेन-देन से जुड़े सबूत उपलब्ध हैं और किडनी बेचने के पूरे मामले की अलग से जांच की जा रही है।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में फैली अवैध साहूकारी, प्रशासनिक उदासीनता और आर्थिक असुरक्षा की गंभीर चेतावनी है। रोशन कुले की कहानी उन तमाम लोगों की पीड़ा को आवाज़ देती है, जो कर्ज़ के बोझ तले दबकर अपनी ज़िंदगी और सेहत तक दांव पर लगाने को मजबूर हो जाते हैं।

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Pratahkal Newsroom

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