अंधविश्वास की पराकाष्ठा और अमानवीयता का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला लातूर जिले के उदगीर-लातूर मार्ग पर स्थित करडखेल पाटी के पास सामने आया है। धन-संपत्ति की लालसा और 'पैसों की बारिश' कराने के अंधविश्वास में एक 15 वर्षीय मासूम लड़की को नग्न कर उस पर अघोरी पूजा करने का प्रयास किया गया। हालांकि, उदगीर ग्रामीण पुलिस की समय पर की गई साहसिक कार्रवाई ने न केवल उस मासूम की जान बचाई, बल्कि उसके सम्मान की भी रक्षा की। इस घटना ने पूरे मराठवाड़ा सहित महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है।

यह मामला 16 अगस्त की दोपहर करीब दो बजे का है, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि करडखेल पाटी के पास एक सुनसान स्थान पर अमानवीय कृत्य चल रहा है। पुलिस ने तुरंत मौके पर छापा मारा, जहाँ का दृश्य देखकर मानवता कांप उठी। वहां आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले की रहने वाली एक नाबालिग लड़की को नग्न अवस्था में जमीन पर लिटाया गया था और उस पर तांत्रिक अनुष्ठान करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए लड़की को उनके चंगुल से छुड़ाया और मौके से सभी संदिग्धों को हिरासत में ले लिया।

जांच के दौरान घटनास्थल से विभिन्न प्रकार की पूजा सामग्री, धार्मिक अनुष्ठान में प्रयुक्त होने वाली वस्तुएं और संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है। जांच एजेंसियां इन सामग्रियों का सूक्ष्मता से अध्ययन कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह केवल अंधविश्वास का मामला था या इसके पीछे नरबलि जैसा कोई और बड़ा षड्यंत्र रचा गया था। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में नरबलि की संभावना को देखते हुए गहन जांच की मांग उठाई है।

इस जघन्य अपराध में कुल 15 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिनका जाल चार राज्यों तक फैला हुआ है। आरोपी महाराष्ट्र के बीड़, अकोला, परभणी और पुणे के साथ-साथ तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के रहने वाले हैं। इन सभी के विरुद्ध 'महाराष्ट्र नरबलि और अन्य अमानवीय, अनिष्ट अघोरी प्रथा एवं जादू-टोना रोकथाम अधिनियम', पॉक्सो (POCSO) और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच से स्पष्ट हुआ है कि विभिन्न राज्यों के ये लोग अंधविश्वास के नाम पर इस अमानवीय कृत्य को अंजाम देने के लिए एकजुट हुए थे।

पुलिस प्रशासन ने इस घटना के बाद नागरिकों से अपील की है कि वे अंधविश्वास के झांसे में न आएं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं और बच्चों का शोषण या जादू-टोना करना एक गंभीर अपराध है। नागरिकों से आह्वान किया गया है कि यदि उन्हें अपने आसपास ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले, तो वे तुरंत पुलिस से संपर्क करें ताकि समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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