लातूर में आवारा कुत्तों के हमले में युवक की मौत, मनपा के खिलाफ प्रदर्शन
भुई गल्ली निवासी 22 वर्षीय विलास गोरवे की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने लातूर महानगरपालिका के मुख्य प्रवेश द्वार पर शव रखकर कार्रवाई की मांग की।

लातूर महानगरपालिका मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर गुरुवार को आवारा कुत्तों के हमले में मृत युवक विलास उत्तम गोरवे के शव को सीढ़ियों पर रखकर प्रदर्शन करते परिजन और स्थानीय नागरिक।
शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक ने एक बार फिर एक युवा की जान ले ली। भुई गल्ली क्षेत्र में रहने वाले 22 वर्षीय विलास उत्तम गोरवे की भटक्या कुत्तों के भीषण हमले में मौत हो गई, जिसके बाद पूरे शहर में आक्रोश फैल गया। घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने मृतक का शव लातूर महानगरपालिका के मुख्य प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर रखकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे मनपा परिसर में लगभग तीन घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
जानकारी के अनुसार, भुई गल्ली निवासी विलास उत्तम गोरवे (उम्र 22) सोमवार, दिनांक 18 मई की सुबह करीब 6 बजे घर से बाहर टहलने निकला था। इसी दौरान क्षेत्र में घूम रहे चार से पांच हिंसक आवारा कुत्तों ने अचानक उस पर जानलेवा हमला कर दिया। कुत्तों ने उसके हाथों, पैरों और गर्दन पर बुरी तरह काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर रक्तरंजित अवस्था में जमीन पर गिर पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने तुरंत उसे उठाकर विलासराव देशमुख गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने लगातार प्रयास किए, लेकिन गंभीर चोटों के चलते उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। बुधवार रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
विलास गोरवे की मौत की सूचना मिलते ही भुई गल्ली क्षेत्र में शोक के साथ गहरा आक्रोश फैल गया। गुरुवार सुबह परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह मृत्यु नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही से हुई हत्या है। इसके बाद उन्होंने शव को महानगरपालिका मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर रख दिया और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन के दौरान “मनपा प्रशासन झोपलं आहे का?”, “निष्पाप तरुणाच्या मृत्यूला जबाबदार कोण?”, “अधिकाऱ्यांवर तात्काळ कारवाई करा!” जैसे नारे लगाए गए, जिससे परिसर में तनाव और भी बढ़ गया।
स्थिति बिगड़ने पर बड़ी संख्या में नागरिक और युवा भी प्रदर्शन में शामिल हो गए। लगातार बढ़ते विरोध और तनाव को देखते हुए महानगरपालिका प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए परिजनों से चर्चा की। इसके बाद प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया कि संबंधित दोषी अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी, गोरवे परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी, शहर में आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए तत्काल अभियान चलाया जाएगा तथा नसबंदी और पकड़ अभियान को तेज किया जाएगा। इसके बाद परिजनों ने शव अंतिम संस्कार के लिए स्वीकार कर लिया।
इस घटना ने लातूर शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को फिर से गंभीर बहस के केंद्र में ला दिया है। नागरिकों का कहना है कि पिछले कई महीनों से शहर में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों तथा सुबह टहलने वाले नागरिकों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि केवल कागजी बैठकों और टेंडर प्रक्रिया तक ही कार्रवाई सीमित है, जबकि जमीनी स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, “कर हमारा है, पैसा हमारा है, लेकिन सुरक्षा नहीं मिल रही है।” वहीं यह भी जानकारी सामने आई है कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण और नसबंदी अभियान के लिए मनपा द्वारा मुंबई स्थित एक कंपनी को टेंडर दिया गया था, लेकिन लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
विलास गोरवे की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस घटना के बाद स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा या फिर एक और मासूम की जान जाने के बाद ही व्यवस्था जागेगी।

Pratahkal Bureau
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