लातूर में राज्यस्तरीय कुश्ती स्पर्धा का उद्घाटन, डॉ. कराड ने दिया शांति का संदेश
डॉ. विश्वनाथ कराड ने मानवतातीर्थ रामेश्वर में १९वीं महाराष्ट्र कुश्ती महावीर केसरी स्पर्धा का शुभारंभ किया, जिसमें २५० पहलवान हिस्सा ले रहे हैं।

लातूर के रामेश्वर (रुई) में आयोजित महाराष्ट्र कुश्ती महावीर केसरी स्पर्धा-२०२६ के उद्घाटन अवसर पर मंच पर उपस्थित डॉ. विश्वनाथ कराड, हिंद केसरी दीनानाथ सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति।
लातूर, १० मार्च: दुनिया में संपूर्ण जीव सृष्टि को विनाश की कगार पर लाकर खड़ा करने वाली भयानक युद्ध स्थिति निर्मित हो गई है। आज आवश्यकता परस्पर स्नेह, आत्मीयता, प्रेम और टीम भावना की है, जो केवल खेल की भावना से ही संभव हो सकती है। युद्ध के स्थान पर खेल और विनाश के स्थान पर विकास का संदेश ही कुश्ती के माध्यम से दिया जाएगा। यह मैदान वैश्विक शांति का एक अखाड़ा है, जहाँ स्वराज्य और स्वराष्ट्र की मिट्टी की कुश्ती का विजय घोष गूंजेगा। यह विचार विश्वशांति केंद्र (आलंदी), माईर्स एमआईटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने व्यक्त किए।
राज्यस्तरीय कुश्ती स्पर्धा का भव्य आयोजन
विश्वशांति केंद्र (आलंदी), माईर्स एमआईटी, पुणे, भारत और महाराष्ट्र राज्य कुश्तीगीर संघ की मान्यता से राष्ट्रधर्मपूजक दादाराव कराड की स्मृति में लातूर स्थित विश्वधर्मी मानवतातीर्थ रामेश्वर (रुई) की पवित्र यज्ञ भूमि पर, विश्व के एकमात्र मानवतातीर्थ भवन के विशाल प्रांगण में अभूतपूर्व राष्ट्रधर्मपूजक दादाराव कराड राज्यस्तरीय महाराष्ट्र कुश्ती महावीर केसरी स्पर्धा-२०२६ का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली स्पर्धा के उद्घाटन अवसर पर डॉ. कराड मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उपस्थित गणमान्य और खेल रत्न
इस अवसर पर हिंद केसरी पैलवान दीनानाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। साथ ही महाराष्ट्र केसरी पैलवान अप्पासाहेब कदम, बंडातात्या पाटिल, बापूसाहेब मोरे, विष्णु जोशीलकर, रामेश्वर (रुई) के पूर्व सरपंच तुलसीराम दा. कराड, काशीराम दा. कराड, विधायक रमेशअप्पा कराड, डॉ. हनुमंत कराड, श्री राजेश कराड, ऋषिकेश कराड, प्रो. तेजस कराड, श्री बालासाहेब बडवे, श्री सरकार निंबाळकर, डॉ. एस. एन. पठान, डॉ. रत्नदीप जोशी, डॉ. महेश थोरवे और प्रो. विलास कथुरे उपस्थित रहे।
महापुरुषों के विचार और खेल भावना
डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि "मऊ मेणाहूनि आम्ही विष्णूदास कठीण वज्रास भेदू ऐसे, ऐसी परंपरा वाले इस गांव में वैश्विक स्तर के पहलवान आ रहे हैं, यह गर्व की बात है। खेल परंपरा से जुड़ा है, जो लोगों को जोड़ता है और भविष्य के जीवन को दिशा देता है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह स्पर्धा पिछले १९ वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है। मुख्य अतिथि दीनानाथ सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि "आधुनिक युग में भी लाल मिट्टी से प्रेम करने वाले डॉ. विश्वनाथ कराड वास्तव में कुश्ती को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। डॉ. कराड पूनम के चांद की तरह हैं। उन्होंने पहलवानों को जो आधार दिया है, उससे उनका खेल के प्रति प्रेम झलकता है।" उन्होंने विश्वास जताया कि इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अगली पीढ़ी पूरी तरह तैयार है।
कुश्ती का वैभव और उद्घाटन मुकाबला
ह.भ.प. बापूसाहेब मोरे ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि "जीवन की हर चीज से आनंद लेना डॉ. कराड से सीखना चाहिए, जिन्होंने प्रत्येक की प्रतिभा को निखारने के लिए यह मंच उपलब्ध कराया है।" वहीं बालासाहेब बडवे ने कहा कि "महाराष्ट्र की कुश्ती के इस वैभव को अजर-अमर रखने के लिए डॉ. विश्वनाथ कराड ने अद्वितीय कार्य किया है।" इस प्रतियोगिता में संपूर्ण महाराष्ट्र से आए २५० पहलवान लाल मिट्टी के अखाड़े में उतरेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन मुकाबला रामेश्वर के प्रसाद शिंदे और कोल्हापुर के प्रणव राख के बीच संपन्न हुआ। स्पर्धा का सजीव प्रसारण और कमेंट्री बाबा निम्हण ने की, जबकि प्रो. विलास कथुरे ने प्रस्तावना में कुश्ती की जानकारी देते हुए सभी का आभार माना।

Pratahkal Bureau
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