लातूर: अनुसूचित जमाती की महिला उम्मीदवार का भाजपा द्वारा अपहरण, तीन दिन बाद आवेदन वापस लेने के दिन हुईं प्रकट
लातूर जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अंजना चौधरी के कथित अपहरण और भाजपा के दबाव में आवेदन वापस लेने का गंभीर आरोप। अभय सालुंखे ने इसे लोकतंत्र की हत्या और आदिवासी समाज की आवाज दबाने की साजिश बताया है।

लातूर प्रतिनिधि: मंगलवार दि. 27 जनवरी 26
लातूर जिले के निलंगा तालुका में जिला परिषद चुनावों के दौरान, पिछड़ा, वंचित आदिवासी समाज की आवाज दबाने का अत्यंत चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। अनुसूचित जमाती की महिला उम्मीदवार को धमकी, दबाव और कथित अपहरण करके उम्मीदवारी आवेदन वापस लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा मजबूर किए जाने का सीधा आरोप जिला कांग्रेस अध्यक्ष अभय सालुंखे ने लगाया है।
घटना का विवरण और आरोप
- जिला कांग्रेस की ओर से जारी किए गए निवेदन में अभय सालुंखे ने कहा है कि:
- निलंगा तालुका के तांबाला गांव की अनुसूचित जमाती की महिला उम्मीदवार अंजना सुनील चौधरी जिला परिषद चुनाव के मैदान में कांग्रेस पार्टी की ओर से मजबूती से उतरी थीं।
- चुनाव आवेदन प्रक्रिया के दौरान अचानक उनका अपहरण कर लिया गया।
- इस संदर्भ में उनके परिजनों ने अपहरण की प्राथमिकी (फिर्याद) दर्ज कराई थी।
पुलिस बंदोबस्त में वापसी और आवेदन वापसी
"तब्बल तीन दिन वह लापता थीं, और ठीक उम्मीदवारी आवेदन वापस लेने के दिन ही वह अचानक पुलिस बंदोबस्त में प्रकट हुईं। पुलिस बंदोबस्त में ही अंजना चौधरी को सीधे चुनाव कार्यालय लाया गया और दबाव में उम्मीदवारी आवेदन वापस लेने पर मजबूर किया गया।"
लोकतंत्र की हत्या और तानाशाही का आरोप
- अभय सालुंखे ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है:
- यह प्रकार केवल एक महिला उम्मीदवार तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर धकेलने का जानबूझकर किया गया प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
- चुनाव लड़ना संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है। उस अधिकार को धमकी, डर और दबाव के दम पर छीन लेना लोकतंत्र की खुलेआम हत्या है।
- देश में पहले से ही गरीब, वंचित, शोषित, पिछड़ा और आदिवासी समाज पर अन्याय होने का चित्र होने के दौरान, इस तरह महिला उम्मीदवारों को निशाना बनाकर चुनाव से बाहर निकालने का प्रयास करना यानी भाजपा की सत्ता का अहंकार और तानाशाही प्रवृत्ति का भयानक उदाहरण है।
- सामाजिक आक्रोश और कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद की स्थिति इस प्रकार है:
- अन्य कई सामाजिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं द्वारा इस घटना के संबंध में रोष व्यक्त किया जा रहा है।
- इस पूरे मामले पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
- जनता में यह भावना है कि यह मौन इस घटना को मूक सहमति है।
- जिला कांग्रेस ने मांग की है कि यदि आदिवासी महिला उम्मीदवार पर अन्याय हुआ है, तो दोषियों पर तत्काल मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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