अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण के विरोध में लातूर में ऐतिहासिक महामोर्चा, हजारों लोगों ने सड़कों पर किया प्रदर्शन
लातूर में अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण के विरोध में निकले ऐतिहासिक महामोर्चे में हजारों लोग जुटे। आंदोलनकारियों ने सरकार को बड़ा चेतावनी संदेश दिया।

लातूर में आयोजित रैली के दौरान मंच पर नीली पगड़ी पहने एक वक्ता सामने बैठी विशाल भीड़ को संबोधित करते हुए, जहां पृष्ठभूमि में बाबासाहेब आंबेडकर का होर्डिंग दिखाई दे रहा है।
लातूर में अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण के प्रस्तावित निर्णय के विरोध में सोमवार को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व महामोर्चा निकाला गया। उपवर्गीकरण विरोधी कृती समिति के नेतृत्व में आयोजित इस महामोर्चे में करीब 59 जातियों के विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। आंदोलन में महिलाओं, पुरुषों और विशेष रूप से युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी प्रमुख आकर्षण रही।
आनंदराज आंबेडकर, पूर्व मंत्री बबनराव घोलप और अमन आंबेडकर के नेतृत्व में महामोर्चा शहर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक से शुरू हुआ। मोर्चे की शुरुआत भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद शहर के विभिन्न मार्गों पर स्थित महापुरुषों की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मोर्चा पुराने जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा।
महामोर्चे के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण के विरोध में जोरदार नारेबाजी की। "अनुसूचित जातियों का उपवर्गीकरण रद्द करो", "संविधान से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी" और "आरक्षण का विभाजन स्वीकार नहीं है" जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। आंदोलन में शामिल युवाओं ने उपवर्गीकरण के विरोध तथा संविधान बचाने के संदेश वाले पोस्टर, बैनर और तख्तियां हाथों में लेकर शासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
महामोर्चे में विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण शहर की प्रमुख सड़कों पर जनसैलाब जैसा दृश्य देखने को मिला। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन बनाए रखा गया, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक पुलिस बल तैनात किया था।
महामोर्चे के समापन पर आंदोलनकारियों ने मांग की कि अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण का प्रस्तावित निर्णय तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो राज्यभर में व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस दौरान आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी संबंधित प्रशासन को सौंपा।
आयोजकों का दावा है कि अनुसूचित जातियों के मुद्दे पर लातूर में अब तक निकाले गए सभी मोर्चों में यह सबसे बड़ा, सबसे अनुशासित और ऐतिहासिक महामोर्चा रहा। हजारों नागरिकों की उपस्थिति में हुए इस प्रदर्शन ने उपवर्गीकरण के विरोध में मौजूद जनभावना को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया।

Pratahkal Bureau
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