लातूर: सरकार की गलत ई-चलन प्रणाली ने सामान्य वाहन मालिकों की कमर तोड़ दी है और इस अन्याय के खिलाफ महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी ने राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है। लातूर जिले के ट्रांसपोर्टर संगठनों ने आज आक्रामक रुख अपनाया। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के मुख्य प्रवेश द्वार पर सैकड़ों वाहन खड़े कर चक्का जाम किया गया, वहीं आक्रामक प्रदर्शनकारियों ने सीधे क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के कक्ष के सामने धरना देकर जोरदार नारेबाजी की। "जुर्माने की लूट बंद करो, अन्यथा कुर्सियां खाली करो" जैसे नारों से आज आरटीओ परिसर गूंज उठा।

प्रदर्शन और चक्का जाम का घटनाक्रम

आंदोलन के मद्देनजर सुबह 10 बजे से ही सैकड़ों निजी बस, टैक्सी और टेंपो मालिकों ने परिवहन कार्यालय के बाहर जमा होना शुरू कर दिया था। देखते ही देखते कार्यालय के मुख्य गेट पर वाहनों का ढेर लग गया और आने-जाने के सभी मार्ग बंद हो गए। संगठन के पदाधिकारी और आक्रोशित ट्रांसपोर्टर सीधे परिवहन अधिकारी के कक्ष में घुस गए। उन्होंने कक्ष के बाहर ही ठिय्या जमा दिया, जिससे अधिकारियों का अपने केबिन से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया।

प्रशासन पर गंभीर आरोप

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पदाधिकारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट रिन्यूअल या ट्रांसफर कराना हो, तो पुराने सभी ई-चलन भरे बिना सॉफ्टवेयर आगे नहीं बढ़ता है, जिससे मालिकों का आर्थिक गणित बिगड़ गया है। कई बार सिग्नल पर गाड़ी न होने के बावजूद या केवल तकनीकी खराबी के कारण हजारों रुपये का जुर्माना गलत तरीके से लगाया जा रहा है। एक छोटी सी गलती के लिए 5 से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला जा रहा है, जिससे गाड़ी चलाकर होने वाले मुनाफे से ज्यादा जुर्माने की राशि हो रही है। इन शिकायतों की आरटीओ प्रशासन द्वारा अनदेखी की जा रही है।

काली पट्टी बांधकर डिजिटल लूट का विरोध

आंदोलन के दौरान कई वाहन मालिकों ने अपने वाहनों पर काली पट्टियां बांधकर सरकार की डिजिटल लूट का विरोध किया। "हम टैक्स भरते हैं, बीमा भरते हैं, फिर हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?" यह सवाल प्रदर्शनकारियों ने उठाया। दो से तीन घंटे चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद आरटीओ प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ई-चलन एक राज्य स्तरीय ऑनलाइन प्रणाली है और इसमें स्थानीय स्तर पर बदलाव करना कठिन है। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। जब तक गलत जुर्माने को रद्द करने के संबंध में लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक कार्यालय न छोड़ने का रुख उन्होंने अपनाया था।

मांगों का ज्ञापन और भविष्य की चेतावनी

आंदोलनकारियों ने मांग की है कि बिना कारण लगे और तकनीकी त्रुटियों वाले ई-चलन तुरंत रद्द किए जाएं। साथ ही जुर्माने की राशि भरने के लिए किस्तें दी जाएं या राशि में छूट दी जाए और बकाया जुर्माने के कारण परमिट या पासिंग को न रोका जाए। इस आंदोलन के कारण आरटीओ में काम के लिए आए सामान्य नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब गेंद सरकार और परिवहन विभाग के पाले में है और यह आंदोलन और तेज होने की संभावना है। इस विरोध प्रदर्शन में लातूर जिला ट्रेवल्स एसोसिएशन, लातूर जिला युवा मोटर मालिक संघ, लोकनायक मोटर चालक मालिक संघ और निजी वाहन चालक मालिक बड़ी संख्या में शामिल थे। जुगलकिशोर तोष्णीवाल, संदीप पाटील, उत्तम लोंढे, खय्युम शेख, विजय केदार, विश्वास कुलकर्णी, सचिन मोटे, सुनील देशपांडे, गोविंद दायमा, मदन केंद्रे, सोमनाथ मेदगे, इनायत सय्यद, नरेश घंटे और अमोल लोकरे ने चेतावनी दी है कि "प्रशासन तुरंत ई-चलन प्रणाली की कमियों को दूर करे अन्यथा और भी तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।"

Pratahkal Bureau

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