लातूर: महापालिका चुनाव से पहले सियासी भूचाल, पूर्व महापौर विक्रांत गोजमगुंडे ने छोड़ा 'हाथ', अमित देशमुख पर साधा तीखा निशाना
लातूर महानगरपालिका चुनाव से पहले पूर्व महापौर विक्रांत गोजमगुंडे ने कांग्रेस का साथ छोड़कर उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौजूदगी में राष्ट्रवादी कांग्रेस में प्रवेश किया। गोजमगुंडे ने अमित देशमुख पर विकास की अनदेखी और वंशवाद का आरोप लगाते हुए राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जानें इस हाई-प्रोफाइल चुनावी सभा की पूरी रिपोर्ट।

महाराष्ट्र के लातूर शहर में आगामी महानगरपालिका चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। चुनावी बिगुल बजते ही आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो चुका है, जिसने शहर के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। विकास और सत्ता के इस महासंग्राम में पूर्व महापौर विक्रांत गोजमगुंडे ने कांग्रेस का साथ छोड़कर 'घड़ी' (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-अजित पवार गुट) का दामन थाम लिया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित एक विशाल प्रचार सभा के दौरान गोजमगुंडे ने पूर्व मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता अमित देशमुख के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर विकास विरोधी होने के गंभीर आरोप लगाए।
इस जनसभा को संबोधित करते हुए विक्रांत गोजमगुंडे ने कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि लातूर शहर के विकास के लिए घोषित किए गए फंड और निर्णय केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह गए। गोजमगुंडे ने दावा किया कि सत्ता में रहने के बावजूद जनता की मूलभूत समस्याओं की जानबूझकर अनदेखी की गई। उन्होंने अमित देशमुख के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर की बुनियादी सुविधाओं की बदहाली का मुख्य कारण इच्छाशक्ति की कमी और निष्क्रियता है। "लातूर को आज केवल वंशवाद और आरोपों की राजनीति की नहीं, बल्कि एक सक्षम और जुझारू नेतृत्व की आवश्यकता है," यह कहते हुए उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को विकास का एकमात्र विकल्प बताया।
मंच से हुंकार भरते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम लिए बिना अप्रत्यक्ष हमला किया, लेकिन उनके शब्दों के निशाने पर स्पष्ट तौर पर विरोधी खेमा था। पवार ने जनसमुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा कि महानगरपालिका चुनाव में विकास कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनहित के निर्णय ही सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने लातूर के कायाकल्प के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है।
इस विशाल जनसभा में हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं और नागरिकों की मौजूदगी ने शहर के बदलते मिजाज को स्पष्ट कर दिया है। विक्रांत गोजमगुंडे का यह दलबदल और अमित देशमुख पर किया गया तीखा प्रहार आने वाले दिनों में लातूर के राजनीतिक रण को और अधिक संघर्षपूर्ण बनाने वाला है। इस घटनाक्रम ने न केवल सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच की लकीर को गहरा कर दिया है, बल्कि मतदाताओं के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है कि वे विकास के दावों और राजनीति के इस नए स्वरूप को किस तरह स्वीकार करते हैं।

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