लातूर पुलिस विभाग में 2.38 करोड़ का गबन, चार कर्मचारियों पर मामला दर्ज
वेतन वितरण में 10 वर्षों से जारी वित्तीय अनियमितता की जांच के बाद लिपिकों और श्रेणी पीएसआई सहित चार लोगों पर कार्रवाई की गई।

लातूर पुलिस मुख्यालय में करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले का खुलासा होने के बाद मीडिया को जानकारी देते अनुविभागीय पुलिस अधिकारी समीरसिंह साल्वे।
लातूर: महाराष्ट्र के लातूर जिला पुलिस बल में एक सनसनीखेज वित्तीय अनियमितता का पर्दाफाश हुआ है, जहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय की वेतन वितरण प्रक्रिया में 2 करोड़ 38 लाख 92 हजार 7 रुपये के गबन का मामला सामने आया है। 'रक्षक ही भक्षक' बनने के इस गंभीर प्रकरण में एक श्रेणी पुलिस उपनिरीक्षक सहित चार कर्मचारियों के विरुद्ध शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार में से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें न्यायालय ने 16 मई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
इस पूरे घोटाले की प्राथमिक जांच में अत्यंत चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जिससे पता चला है कि धोखाधड़ी का यह खेल मई 2015 से मार्च 2025 तक यानी पिछले दस वर्षों से निरंतर जारी था। आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से वेतन अभिलेखों में बड़े पैमाने पर कांट-छांट की और फर्जी दस्तावेज तैयार किए। उन पर आरोप है कि उन्होंने विभिन्न वेतन शीर्षकों के तहत अतिरिक्त राशि मंजूर करवाई और शासन की आंखों में धूल झोंकी। जांच के अनुसार, आरोपियों ने इंसेंटिव, बेसिक एरियर और स्पेशल पे जैसी वेतन मदों में फर्जी बढ़ोतरी दिखाकर अतिरिक्त धन राशि को सीधे अपने निजी बैंक खातों में हस्तांतरित कर लिया था।
इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध उदगीर के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी गजानन भातलवंडे की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(4), 316(5) एवं अन्य संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। नामजद आरोपियों में लिपिक राहुल गोविंदराव वागदरे, लिपिक ब्रिजकिशोर ठाकुर, लिपिक दत्तात्रय मारुति क्षीरसागर और श्रेणी पुलिस उपनिरीक्षक अजय दिगंबर सूर्यवंशी शामिल हैं। लातूर जिला पुलिस प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, लातूर शहर संभाग के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी समीरसिंह साल्वे इस घोटाले की गहराई से जांच कर रहे हैं, जिससे इस वित्तीय कदाचार की परतें और भी खुलने की संभावना है।

