लातूर में एक बार फिर 'लातूर पॅटर्न' ने अपनी गुणवत्ता, मेहनत और निरंतर सफलता के दम पर खुद को साबित किया। कभी इस पद्धति पर सवाल उठाए गए, इसकी आलोचना हुई और बदनाम करने के प्रयास भी हुए, लेकिन हर बार लातूर ने अपनी उपलब्धियों से इन सभी आरोपों का जवाब दिया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री विद्या आराधना अकादमी ने री-नीट 2026 और जेईई परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भव्य 'गुणवंत गौरव समारोह' उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया।

रविवार, 26 जुलाई को शहर के थोरेमोटे लॉन्स में आयोजित इस समारोह में करीब तीन हजार विद्यार्थी, अभिभावक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरा परिसर विद्यार्थियों की सफलता के उत्साह, अभिभावकों की भावनाओं और तालियों की गूंज से सराबोर रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत मेधावी विद्यार्थियों के उत्साहपूर्ण स्वागत से हुई। इसके बाद प्रत्येक विद्यार्थी का उनके अभिभावकों के साथ पौधा, नकद पुरस्कार और सम्मानचिह्न देकर सम्मान किया गया। अपने बच्चों की सफलता का यह क्षण देखकर कई अभिभावकों की आंखें नम हो गईं। विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय अकादमी के प्रबंधन, अनुभवी शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग को दिया।








इस अवसर पर अभिभावकों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अकादमी के अनुशासित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। समारोह में समाज के पत्रकारों का भी विशेष सम्मान किया गया और समाज जागरूकता में उनके योगदान की प्रशंसा की गई।

यह आयोजन केवल मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लातूर पॅटर्न पर विश्वास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की परंपरा और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का भी प्रतीक बना। उपस्थित लोगों के लिए यह समारोह प्रेरणादायी और यादगार साबित हुआ।

अकादमी के संचालक प्रो. सतीश पवार ने संस्था की पांच वर्षों की सफल यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा, "श्री विद्या आराधना अकादमी की स्थापना केवल व्यवसाय के उद्देश्य से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आंदोलन खड़ा करने के लिए की गई है। विद्यार्थियों की मेहनत को सही दिशा देना और उन्हें सफलता तक पहुंचाना ही हमारा लक्ष्य है।"

उन्होंने आगे कहा, "इस वर्ष कठिन प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों के बावजूद अकादमी के 325 विद्यार्थी एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए पात्र बने हैं, जबकि 250 से 300 विद्यार्थी देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में प्रवेश प्राप्त करेंगे। यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। अकादमी में आने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को उत्कृष्ट परिणाम दिलाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।"

अकादमी के संचालक संजय लड्डा ने विद्यार्थियों की सफलता की सराहना करते हुए कहा, "सफलता मेहनत का परिणाम होती है। विद्यार्थियों ने दिन-रात परिश्रम करके यह उपलब्धि हासिल की है। लेकिन केवल लक्ष्य ही नहीं, बल्कि जीवन का एक निश्चित 'Purpose' होना भी उतना ही आवश्यक है। यदि गुणवत्ता के साथ नैतिकता भी जुड़ी हो तो समाज में वास्तविक सम्मान मिलता है। विद्यार्थियों ने हम पर जो विश्वास जताया है, उसे हम कभी कम नहीं होने देंगे।"

उन्होंने लातूर पॅटर्न की आलोचना करने वालों को भी जवाब देते हुए कहा, "गुणवत्ता के बल पर लातूर का नाम एक बार फिर देश के शैक्षणिक मानचित्र पर और अधिक उज्ज्वल रूप से स्थापित करने का हमारा संकल्प है।"

समारोह के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि एक समय पूरे देश के लिए आदर्श माने जाने वाले 'लातूर पॅटर्न' ने बदलते समय, आलोचनाओं, विवादों और चुनौतियों के बावजूद अपनी गुणवत्ता की पहचान बनाए रखी है। लातूर की शिक्षण संस्थाओं और विद्यार्थियों ने मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट परिणामों के आधार पर सफलता की परंपरा को कायम रखा है। श्री विद्या आराधना अकादमी का यह गुणवंत गौरव समारोह केवल विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि इस बात का भी प्रमाण बना कि 'लातूर पॅटर्न' आज भी उतना ही सक्षम, विश्वसनीय और बावनकशी सोने की तरह खरा है।

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