लातूर महानगरपालिका चुनाव: क्या विक्रांत गोजमगुंडे बनेंगे 'किंगमेकर'? अजीत पवार की हुंकार से पलटेगा सत्ता का समीकरण
लातूर महानगरपालिका चुनाव 2026 के रोमांचक मुकाबले में विक्रांत गोजमगुंडे की भूमिका और अजीत पवार की 9 जनवरी की जनसभा से बदलने वाले सत्ता समीकरणों पर विशेष रिपोर्ट। अमित देशमुख की कांग्रेस, भाजपा और राकांपा के बीच छिड़े इस सियासी घमासान में कौन मारेगा बाजी? जानिए लातूर की राजनीति का पूरा हाल।

लातूर: महाराष्ट्र की सियासत में लातूर शहर महानगरपालिका का चुनाव इस समय सबसे चर्चित विषय बन गया है। जिले की राजनीतिक सरगर्मी उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने 'घड़ी' चुनाव चिह्न के साथ पूरी ताकत झोंकने का ऐलान कर दिया। आगामी 15 जनवरी को होने वाले इस मतदान में पूर्व महापौर विक्रांत गोजमगुंडे की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या गोजमगुंडे इस बार 'किंगमेकर' की भूमिका निभाकर सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखेंगे।
इस चुनावी रण को और अधिक धार देने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत दादा पवार कल, शुक्रवार यानी 9 जनवरी को लातूर के ऐतिहासिक डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर पार्क में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। दोपहर 12:15 बजे होने वाली यह सभा न केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम है, बल्कि इसे इस चुनाव का 'टर्निंग पॉइंट' भी माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अजीत पवार की इस हुंकार से शहर के पुराने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह ध्वस्त हो सकते हैं।
लातूर में इस समय त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस की ओर से राज्य के सहकारिता मंत्री ना. बाबासाहेब पाटील, पूर्व मंत्री एवं विधायक संजय बनसोडे, और विधायक विक्रम काले ने कमान संभाली हुई है। वहीं, 'हाथ' का साथ छोड़कर 'घड़ी' का दामन थामने वाले विक्रांत गोजमगुंडे ने पार्टी को एक प्रभावशाली विकल्प के रूप में खड़ा कर दिया है। गोजमगुंडे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं के बीच एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है, जिससे राकांपा का प्रचार अभियान दिन-प्रतिदिन आक्रामक होता जा रहा है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस के गढ़ को बचाने की पूरी जिम्मेदारी पूर्व मंत्री और विधायक अमित देशमुख ने अपने कंधों पर ले रखी है। देशमुख परिवार के लिए यह चुनाव साख की लड़ाई बन चुका है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी पीछे नहीं है। पालक मंत्री ना. शिवेंद्रसिंहराजे भोसले के साथ-साथ पार्टी के वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद और प्रमुख पदाधिकारी मैदान में डटे हुए हैं। गौरतलब है कि बीते दिन ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लातूर में एक ऐतिहासिक जनसभा कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है।
कल की सभा में अजीत पवार द्वारा दिए जाने वाले संकेतों और विरोधियों पर किए जाने वाले प्रहारों पर पूरे शहर की नजरें टिकी हैं। क्या वे मतदाताओं को रिझाने में सफल होंगे या अमित देशमुख का करिश्मा बरकरार रहेगा, यह तो भविष्य ही बताएगा। फिलहाल, लातूर की जनता और राजनीतिक विश्लेषक इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि कल की यह जनसभा शहर की सत्ता के समीकरणों को किस दिशा में मोड़ती है।

Pratahkal Bureau
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