लातूर | समाचार सेवा लातूर महानगरपालिका के आगामी चुनावी दंगल ने शहर के राजनीतिक गलियारों में एक अभूतपूर्व हलचल पैदा कर दी है। सत्ता की बिसात पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टिकट बंटवारे में एक-दूसरे को 'शह और मात' देने के लिए जो रणनीतिक दांव खेले हैं, उसने कई कद्दावर नेताओं और पूर्व पार्षदों के पैरों तले से जमीन खिसका दी है। अनुभवी चेहरों को दरकिनार कर नए समीकरणों को साधने की इस कवायद ने जहां स्थापित दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है, वहीं शहर की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील होती नजर आ रही है।

चुनाव के इस रण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब टिकट से वंचित नाराज पूर्व पार्षदों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) का दामन थाम लिया। अपने ही दलों द्वारा उपेक्षित किए जाने का आरोप लगाते हुए इन नेताओं ने अब 'घड़ी' के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरने का फैसला किया है। टिकट पाने के लिए मची इस आपाधापी और दलबदल की कसरत ने लातूर नगर निगम के चुनावी मैदान को पूरी तरह से दहला दिया है। इन बागी नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि पार्टियों ने दशकों के अनुभव और जमीनी पकड़ को नजरअंदाज कर केवल आंतरिक गुटबाजी और नए चेहरों के नाम पर बलि दी है।

इस राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाने में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) सबसे आगे दिखाई दे रही है। पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा के बागियों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं, जिससे विभिन्न वार्डों में चुनावी समीकरण पूरी तरह से उलट गए हैं। अब स्थिति यह है कि कल तक एक ही झंडे के नीचे काम करने वाले पूर्व सहयोगी आज एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। वहीं, विपक्षी खेमे यानी महाविकास अघाड़ी में भी सब कुछ सामान्य नहीं है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) द्वारा कई प्रमुख सीटों पर स्वतंत्र उम्मीदवार उतारने के फैसले ने इस मुकाबले को चतुष्कोणीय और पंचकोणीय बना दिया है।

प्रशासनिक तैयारियों की बात करें तो लातूर मनपा की 70 सीटों के लिए कुल 759 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, आज नामांकनों की छानबीन की जाएगी, जिसके बाद 1 और 2 जनवरी को नाम वापसी की प्रक्रिया होगी। 3 जनवरी को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाएगा और 15 जनवरी को लातूर की जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी। आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने सभी 70, कांग्रेस ने 65 और अजित पवार गुट ने 60 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। प्रभाग 15 (डी) में सर्वाधिक 25 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है, जो इस चुनाव की भीषण प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। दिग्गजों की बगावत और छोटे दलों की सक्रियता के बीच अब यह अनुमान लगाना कठिन हो गया है कि लातूर का अगला महापौर कौन होगा, लेकिन यह निश्चित है कि इस बार के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेंगे।

Limbraj Panhalkar (Latur)

Limbraj Panhalkar (Latur)

नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर

वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)

कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)

बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग

अनुभव: 20 साल

परिचय

लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

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