लातूर मनपा की आमसभा में कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, हंगामे के बीच 28 में से 26 प्रस्ताव मंजूर
लातूर महानगरपालिका की सामान्य सभा कांग्रेस और भाजपा की नारेबाजी के बीच हंगामे में समाप्त हुई। 28 में से 26 प्रस्ताव मंजूर हुए, जबकि शहर के अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।

तस्वीर में लातूर महानगरपालिका के सभागार में बाएं से दाएं नगरसेवक एक-दूसरे के सामने खड़े होकर चर्चा और नारेबाजी करते दिखाई दे रहे हैं।
लातूर महानगरपालिका की बुधवार को आयोजित सामान्य सभा नागरिकों के शहरी मुद्दों पर चर्चा के बजाय सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच तीखी नारेबाजी के कारण पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गई। पहले ही विषय पर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ ही मिनटों में 28 में से 26 विषय बहुमत से मंजूर होने की घोषणा कर दी गई और राष्ट्रगान के बाद सभा समाप्त कर दी गई।
सभा समाप्त होने की घोषणा होते ही भाजपा के नगरसेवक आक्रामक हो गए और उन्होंने सभागार की गैलरी में उतरकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस के नगरसेवक भी गैलरी में पहुंच गए। दोनों दलों के नगरसेवक आमने-सामने आ गए, जिससे सभागार में भारी हंगामा मच गया। दोनों पक्षों की जोरदार नारेबाजी के कारण कुछ समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
महापौर जयश्री सोनकांबळे की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा के समक्ष शहर की पानी की कमी, कचरा प्रबंधन, सड़कों पर गड्ढे, निचले इलाकों में बारिश का पानी भरने की समस्या, अवैध निर्माण, स्कूलों की बदहाल स्थिति, यातायात संकेतक, भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 75 फीट ऊंची पूर्णाकृति प्रतिमा का प्रस्ताव तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष दिवंगत शिवराज पाटील चाकूरकर के स्मारक सहित कई महत्वपूर्ण विषय रखे गए थे। हालांकि किसी भी विषय पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी और सभा हंगामे के बीच समाप्त हो गई।
सभा के दौरान पूर्व महापौर दीपक सुळ द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने तथा कांग्रेस के गुटनेता विजयकुमार साबदे द्वारा उसका अनुमोदन किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद सभी विषय बहुमत से मंजूर होने की घोषणा कर दी गई।
सभा समाप्त होने के बाद कांग्रेस और भाजपा के पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। दूसरी ओर, शहर के वरिष्ठ नागरिकों, सामाजिक संगठनों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और आम नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी जताई। नागरिकों का कहना था कि शहर के गंभीर शहरी मुद्दों का समाधान निकालने के बजाय जनप्रतिनिधियों का हंगामा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
महानगरपालिका की इस सभा से नागरिकों को शहर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद थी, लेकिन सत्तारूढ़ और विपक्ष के राजनीतिक टकराव में यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहने के बीच सभा हंगामे में समाप्त होने से नागरिकों में गहरा असंतोष का माहौल है।

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