लातूर जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की दिशा में वर्ष 2025 स्थानीय अपराध शाखा (लोकल क्राइम ब्रांच – एलसीबी) के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, लातूर द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, एलसीबी ने आधुनिक तकनीक, सशक्त खुफिया तंत्र और सटीक रणनीति के बल पर न केवल संगीन अपराधों का खुलासा किया, बल्कि संगठित और अवैध धंधों पर भी अब तक की सबसे प्रभावी कार्रवाई की है। इस वर्ष एलसीबी ने विभिन्न चोरी के मामलों में 4 करोड़ 63 लाख 95 हजार 550 रुपये की संपत्ति बरामद की, वहीं अवैध व्यवसायों पर कार्रवाई करते हुए 12 करोड़ 63 लाख 55 हजार 623 रुपये का मुद्देमाल जब्त किया गया।




लातूर जिला पुलिस के अनुसार, जिले में बढ़ती आबादी, व्यापारिक गतिविधियां और अंतरराज्यीय सीमाओं को देखते हुए एलसीबी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। पुलिस अधीक्षक श्री अमोल तांबे के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और अपर पुलिस अधीक्षक मंगेश चव्हाण के पर्यवेक्षण में, पुलिस निरीक्षक सुधाकर बावकर के नेतृत्व में एलसीबी ने खुद को पुलिस प्रशासन की “तीसरी आंख” के रूप में स्थापित किया है। यह शाखा केवल अपराधों के बाद जांच तक सीमित नहीं रही, बल्कि अपराध होने से पहले ही उन्हें रोकने में भी अग्रणी भूमिका निभाती रही।




वर्ष 2025 में एलसीबी ने तकनीकी विश्लेषण, साइबर इंटेलिजेंस और अपराधियों की कार्यशैली यानी मोडस ऑपरेंडी के अध्ययन के माध्यम से कई जटिल मामलों को सुलझाया। मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल ट्रेल के आधार पर अपराधियों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी गई। इसी रणनीति के तहत जिले में हुए 10 संवेदनशील हत्या मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा कर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें वाडवणा पुलिस थाना क्षेत्र में एक परप्रांतीय महिला की हत्या कर शव को सूटकेस में भरकर फेंकने का सनसनीखेज मामला और औसा पुलिस थाना क्षेत्र में कार जलाकर खुद की मौत का झूठा नाटक रचने का मामला शामिल है। इसके अलावा, किंगांव पुलिस थाना क्षेत्र के बहुचर्चित डकैती मामले में आरोपी को मुद्देमाल सहित गिरफ्तार किया गया।




एलसीबी ने चोरी, घरफोड़ और जबरी चोरी जैसे अपराधों में भी बड़ी सफलता हासिल की। जिले और जिले के बाहर के कुल सैकड़ों मामलों का पर्दाफाश कर करोड़ों रुपये का चोरी गया माल बरामद किया गया। इसके साथ ही अवैध जुआ, देशी शराब, गुटखा और तंबाकू तस्करी, अवैध रेत उत्खनन और मादक पदार्थों की तस्करी पर सख्त कार्रवाई की गई। विशेष रूप से अवैध रेत उत्खनन के मामलों में 9 करोड़ 59 लाख 83 हजार रुपये से अधिक का मुद्देमाल जब्त किया गया, जबकि मादक पदार्थों के मामलों में मेफेड्रोन (एमडी) जैसे खतरनाक ड्रग्स की बरामदगी भी हुई। अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए सात देसी कट्टे जब्त किए गए।

अपराध नियंत्रण के साथ-साथ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई पर भी विशेष जोर दिया गया। महाराष्ट्र प्रिवेंशन ऑफ डेंजरस एक्टिविटीज (एमपीडीए) के तहत दो खतरनाक अपराधियों को नजरबंद किया गया, जबकि संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के अंतर्गत 20 आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की गई। इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत संभावित अपराधों को रोकने के लिए कई प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। लगातार अपराध करने वालों और क्षेत्र में दहशत फैलाने वालों के खिलाफ हद्दपारी जैसी कड़ी कार्रवाई भी की गई।

पुलिस प्रशासन का मानना है कि इन सभी सफलताओं के पीछे जनता का विश्वास और सहयोग सबसे बड़ी ताकत रहा है। लातूर जिला पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अवैध व्यवसाय की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। पुलिस अधीक्षक श्री अमोल तांबे, अपर पुलिस अधीक्षक मंगेश चव्हाण के मार्गदर्शन और पुलिस निरीक्षक सुधाकर बावकर के नेतृत्व में स्थानीय अपराध शाखा लातूर जिले को अपराधमुक्त, सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

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Pratahkal Newsroom

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