लातूर में हेलमेट अनिवार्यता लागू होने के पहले ही दिन पुलिस ने बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। जिले में बढ़ते हादसों और उनसे होने वाली जनहानि को रोकने के लिए 1 सितंबर से हेलमेट अनिवार्यता की प्रत्यक्ष अमल शुरू की गई। पहले दिन लातूर पुलिस ने 787 बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए कुल 7 लाख 87 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

यह कार्रवाई जिले के विभिन्न पुलिस थानों की सीमाओं में आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों पर की गई। बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों को रोककर यातायात नियमों का उल्लंघन करने के मामले में प्रचलित कानून के अनुसार जुर्माना लगाया गया।

हेलमेट अनिवार्यता अचानक लागू नहीं की गई है। लातूर पुलिस विभाग की ओर से मार्च से ही नागरिकों के बीच लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा था। हेलमेट के महत्व, हादसे के दौरान सिर में होने वाली गंभीर चोट के खतरे और हेलमेट के कारण बचने वाली जानों के बारे में नागरिकों को बार-बार जानकारी दी गई। इसके बावजूद अपील के बाद भी कई दोपहिया वाहन चालक हेलमेट का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने दंडात्मक कार्रवाई शुरू की।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि हादसों में होने वाली जनहानि को रोकना है। किसी परिवार का कमाने वाला व्यक्ति दोपहिया वाहन से बाहर निकलता है और हादसे में उसकी मौत हो जाती है, तो उस परिवार में जीवनभर की कमी पैदा हो जाती है। कुछ सेकंड तक हेलमेट नहीं पहनने की गलती पूरे परिवार का जीवन उजाड़ सकती है।

पुलिस का संदेश है कि ‘पुलिस दिखाई दे इसलिए हेलमेट पहनना’ नहीं, बल्कि ‘पुलिस दिखाई न दे तब भी हेलमेट पहनना’ जैसी मानसिकता हर दोपहिया वाहन चालक को विकसित करनी होगी।

पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे के निर्देशों के अनुसार अपर पुलिस अधीक्षक मंगेश चव्हाण, शहर उपविभाग के उपविभागीय पुलिस अधिकारी समीरसिंह साळवे, चाकूर उपविभाग के उपविभागीय पुलिस अधिकारी मायने तथा निलंगा उपविभाग के उपविभागीय पुलिस अधिकारी विशाल डुमे सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं सड़क पर उतरकर अभियान में हिस्सा लिया।

इस दौरान अधिकारियों ने वाहन चालकों से संवाद किया और उन्हें हेलमेट के महत्व की जानकारी दी। साथ ही यातायात नियमों का पालन करने तथा हर बार हेलमेट का इस्तेमाल करने की अपील की गई।

हेलमेट अनिवार्यता का अमल चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। पहले चरण में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर कार्रवाई शुरू की गई है। जिले में 100 प्रतिशत हेलमेट इस्तेमाल की आदत विकसित होने तक इस अभियान को लगातार जारी रखने का लातूर पुलिस ने संकल्प जताया है।

पुलिस के अनुसार जुर्माने की राशि भरकर बचा जा सकता है, लेकिन चली गई जान वापस नहीं आती। इसलिए नागरिक पुलिस की कार्रवाई का इंतजार किए बिना अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हेलमेट का इस्तेमाल करें। लातूर पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि हेलमेट बोझ नहीं, बल्कि परिवार का सुरक्षा कवच है। सड़क पर निकलते समय वाहन की चाबी हाथ में लेने से पहले हेलमेट सिर पर होना चाहिए, क्योंकि घर पर परिवार इंतजार करता है और उनके लिए हर यात्रा का सुरक्षित होना महत्वपूर्ण है।

Limbraj Panhalkar (Latur)

Limbraj Panhalkar (Latur)

नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर

वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)

कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)

बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग

अनुभव: 20 साल

परिचय

लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

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